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एक साल पहले बजट में स्वीकृत दो करोड़, अब तक नहीं मिले

भगवान केशवराय मंदिर को बजट की दरकार है। बजट के अभाव में मंदिर खोखला होता जा रहा है, जिस जगह पत्थर टूट कर गिर रहे और शिखर जर्जर हो चुका है।

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बूंदी

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pankaj joshi

Feb 17, 2025

एक साल पहले बजट में स्वीकृत दो करोड़, अब तक नहीं मिले

केशवरायपाटन. जर्जर हुई कलाकृतियां

केशवरायपाटन. भगवान केशवराय मंदिर को बजट की दरकार है। बजट के अभाव में मंदिर खोखला होता जा रहा है, जिस जगह पत्थर टूट कर गिर रहे और शिखर जर्जर हो चुका है। माणक चौक हो या मुख्य प्रवेश द्वार सब को मरम्मत का इंतजार है। यहां के लिए बजट स्वीकृत नहीं होने से मंदिर की सुरक्षा खतरे में पड़ चुकी है, लेकिन शासन व प्रशासन इस बारे में गंभीर नहीं है। पांच दशकों में यहां करोड़ों रुपए स्वीकृत हुए, लेकिन खर्च नहीं हो पाए। राज्य सरकार ने वर्ष 2023-24 के बजट में पौराणिक केशव धाम के लिए दो करोड़ खर्च करने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री घोषणा कर बजट जारी करना ही भूल गए। मंदिर के समग्र विकास के लिए धन की जरूरत है, लेकिन इसके लिए कार्य-योजना तैयार नहीं हो पाई।

प्रयास धरातल पर नहीं उतरे
भगवान केशवराय मंदिर क्षेत्र पर कॉरिडोर बनाने के लिए प्रसादम योजना के तहत दो साल पहले प्रयास शुरू किए गए थे, लेकिन वह अभी धरातल पर नहीं उतर पाई है। विभाग 70 करोड़ रुपए से ज्यादा की इस योजना का शिलान्यास दो वर्ष पहले चंबल नदी किनारे समारोह आयोजित किया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल रैली के माध्यम से किया गया था, लेकिन यहां कार्य शुरू अब तक नहीं हो पाया है।

मंदिर का कोना-कोना हुआ जर्जर
चंबल नदी किनारे स्थित पौराणिक केशव मंदिर पांच सौ साल से प्रकृति के थपेड़े सह रहा है। इसकी पौराणिकता के साथ हमेशा छेड़छाड़ होती रही है। कहीं सीमेंट लगा कर कलाकृतियों के स्वरूप के बिगाड़ दिया तो कहीं देवस्थान विभाग ने क्षतिग्रस्त कलाकृतियों को दोबारा बना कर लगाने की योजना बना कर कलाकृतियों को उखाड़ दिया। एक दशक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मंदिर की कलाकृतियों को नया स्वरूप देने के लिए पांच करोड़ रुपए स्वीकृत कर इसका काम पुरातत्व विभाग सौंपा गया था। विभाग का ठेकेदार आधा अधूरा काम कर छोड़ गया। अब बनाईं गई कलाकृतियां धुल खा रही है। मंदिर का शिखर क्षतिग्रस्त हो चुका है। पत्थर उखड़ने से श्रद्धालुओं ठोकरें खाते हैं।