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बुरहानपुर की नर्सें मरीजों के लिए बन रही जीवनदाता, रक्तदान से बचा रहे जिंदागियां

international nursing day: अस्पताल में मरीज की जान बचाने के लिए डॉक्टर्स के साथ नर्सिंग स्टाफ की भूमिका भी अहम होती है। जिला अस्पताल में ऐसी नर्सिंग ऑफिर्स कार्यरत है जो मरीजों की सेवा के साथ अक्सर गंभीर स्थिति या इमरजेंसी के समय रक्तदान कर मरीजों को नया जीवन दे रही है।

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international nursing day

बुरहानपुर की नर्सें मरीजों के लिए बन रही जीवनदाता, रक्तदान से बचा रहे कही जिंदागियां (Burhanpur nurses are becoming lifesavers for patients, saving lives through blood donation)

अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस


international nursing day: Burhanpur अस्पताल में मरीज की जान बचाने के लिए डॉक्टर्स के साथ नर्सिंग स्टाफ की भूमिका भी अहम होती है। जिला अस्पताल में ऐसी नर्सिंग ऑफिर्स कार्यरत है जो मरीजों की सेवा के साथ अक्सर गंभीर स्थिति या इमरजेंसी के समय रक्तदान कर मरीजों को नया जीवन दे रही है। जूनियर को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करने अब रक्तदान करने वाली नर्सें की संख्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा नर्सिंग दिवस पर नर्सों का सम्मान किया जाएगा।

दरअसल गंभीर परिस्थितियों में कही बार गर्भवतियों के साथ अन्य मरीजों को रक्त की आवश्यकता होती है, लेकिन किसी कारणवश रक्त बैंक से तुरंत आपूर्ति संभव नहीं हो पाती, तब नर्सें व्यक्तिगत तौर पर रक्तदान कर मरीजों की जिंदगी बचा रही हैं। विशेषकर ऐसी स्थिति गर्भवती महिलाओं के समय होती है। जिला अस्पताल में कार्यरत 98 नर्सिंग ऑफिसर्स कार्यरत है। प्रसूता वार्ड, मेडिकल और एसएनसीयू में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ एक फोन पर रक्तदान के लिए ब्लड बैंक पहुंच जाते है, अधिकांश ऐसी परिस्थिति रात्रि के समय होने पर मरीजों की जीवन रक्षा के लिए नर्सें महत्वपूर्ण योगदान देती है।

10 बार से अधिक किया रक्तदान

जिला अस्पताल की नर्सिंग ऑफिसर प्रीति थॉमस ने 10 बार से अधिक रक्तदान किया है। हर समय रक्तदान के लिए तैयार रही है। बी पॉजिटिव ब्लक गु्रप होने से इमरजेंसी के समय स्टाफ के लोग उन्हे याद करते है। एक फोन कॉल पर ब्लड बैंक पहुुंचकर रक्तदान करने के साथ संबंधित मरीज के स्वास्थ्य की जानकारी लेकर ध्यान भी रखती है। प्रीति थॉमस ने गर्भवतियों को रक्त के लिए परेशान होता देखकर रक्त देने की शुरूआत की थी। रक्तदान कर वे केवल एक मरीज की जान ही नहीं बचातीं, बल्कि एक परिवार को टूटने से भी बचाती हैं। गर्भवती महिला के लिए रक्त की कमी मां और शिशु दोनों के लिए जानलेवा हो सकती है। ऐसे में वे तुरंत मदद के लिए तैयार रहती हैं।

संकट में रक्तदान कर बचाई जान

एनएनसीयू में पदस्थ नर्सिंग ऑफिसर प्रगति ने अभी तक करीब 3 से 5 बार रक्तदान किया। पढ़ाई के दौरान से ही रक्तदान के फायदे सूने थे, एक बार नर्सिंग स्टाफ को रक्तदान के लिए प्रेरित किया गया तो उन्होने ब्लड बैंक पहुंचकर रक्तदान किया था जो संकट के समय एक मरीज को चढ़ाया गया। इसलिए उन्होने रक्तदान के लिए हमेशा तैयार रहने की बात कही। सीनियर्स नर्संे को रक्तदान करता देख अब जूनियर नर्सिंग स्टाफ भी इमरजेंसी के समय रक्तदान के लिए तैयार हो रहे है। इस तरह मेंटरनिटी विभाग प्रभारी नर्सिंग ऑफिसर संतोष पाल,एसएनसीयू स्टाफ की रेखा रोशनी भी रक्तदान कर रही है।