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चंद्रयान-2 : जिस पर दुनिया की नजर, उस पर बुरहानपुर के दिनेश अग्रवाल की अहम भूमिका

- बुरहानपुर के लिए गौरव की बात - शहर के निवासी है दिनेश अग्रवाल- 30 साल से इसरो में है अग्रवाल

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 Chandrayaan-2: Dinesh Aggarwal of Burhanpur has an important role on which the world is watching.

Chandrayaan-2: Dinesh Aggarwal of Burhanpur has an important role on which the world is watching.

बुरहानपुर. चंद्रयान-2 की लैंडिंग 7 सितंबर की रात 1.30 बजे चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर होगी। इस पर पूरे दुनियाभर की नजर रहेगी। यह चंद्रमा पर पहुंचकर विक्रम लैंडर करेगा और प्रज्ञान रोवर सुबह 5.30 निकलेगा, जो चंद्रमा की सतह पर चलकर फोटो लेना शुरू करेगा। बड़ी बात यह है कि इसमें लगाए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के निर्माण में बुरहानपुर के निवासी दिनेश अग्रवाल की अहम भूमिका रही, जो इसरो में वरिष्ठ वैज्ञानिक है।
दिनेश अग्रवाल इसरो में वरिष्ठ वैज्ञानिक है। चंद्रयान-२ के अंदर इलेक्ट्रिॉनिक सर्किट का निर्माण हुआ वह इनकी निगरानी में हुआ। अग्रवाल ने पत्रिका से खास बातचीत में बताया कि इस इलेक्ट्रिॉनिक आयटम को चंद्रयान-2 में लगाने में छह माह लगे।
यह रखा गया ध्यान
अग्रवाल ने बताया कि इसमें विभिन्न प्रकार के इंस्ट्रिुमेंट लगाए गए हैं, जो उच्च गुणवत्ता का बनाना पड़ता है। इसमें खास बात का यह ध्यान रखा गया कि चंद्रमा पर माइनेस डिग्री में यह इलेक्ट्रिॉनिक आयटम सहन कर सके। इसलिए इसमें बहुत सावधानी रखना पड़ती है। क्योंकि उदाहरण के तौर पर जमीन पर मोबाइल खराब हुआ तो उसकी रिपेयरिंग हो जाएगी लेकिन ऊपर जाने के बाद उसे रिपयेर नहीं कर सकते। कठिन वातावरण के बावजूद यह काम कर सके। अग्रवाल ने कहा कि चंद्रमा पर सॉफ्ट लेंडिंग कराना यह इसरो के लिए बड़ी सफलता होगी। यह विश्व का पहला प्रयास होगा, जब चंद्रयान-२ दक्षिण ध्रुव में उतरेगा। 22 जुलाई को रात 1.30 बजे छोड़ा गया, जो 7 सितंबर की रात 1.30 बजे उतरेगा। विक्रम लैंडर करेगा और रोवर का नाम प्रज्ञान दिया है, जो सुबह 5.30 बजे निकलेगा। चंद्रमा की सतह पर चलकर फोटो लेना शुरू करेगा। यहां विभिन्न प्रकार के प्रयोग होंगे, फोटोग्राफी ली जाएगी। चंद्रमा पर खनिज, पानी, विभिन्न प्रकार के जानकारी मिलेगी। अग्रवाल की भूमिका 2008 में छोड़े गए चंद्रयान 1 में भी भूमिका रही थी।
हिंदी प्राथमिक शाला भारत मैदान में पढ़े
प्रवक्ता रामकुमार अग्रवाल ने बताया कि दिनेश कुमार पिता दगडूलाल अग्रवाल आज देश की संस्था इसरो में अपने शहर बुरहानपुर का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मेन हिंदी प्राथमिक शाला भारत मैदान एवं सुभाष हायर सेकेंडरी स्कूल बुरहानपुर में 11वीं तक पढ़ाई पूरी की। शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज उज्जैन से इलेक्ट्रोनिक में इंजीनियरिंग आनर्स स्नातक की उपाधि प्राप्त के बाद एमबीए किया। वर्तमान में वे एसएसी इसरो में वरिष्ठ वैज्ञानिक है। अब तक उन्होंने करीब 130 दूरसंचार एवं दूरसंवेदी उपग्रहों एवं चंद्रयान.1, मंगलयान एवं चंद्रयान 2 के विभिन्न पेलोड इलेक्ट्रॉनिक फैब्रिकेशन के कार्य का मार्गदर्शन किया है। वे विभिन्न उपग्रहों के अलावा चन्द्रयान.1 परियोजना के भी प्रोजेक्ट मेनेजर रह चुके हैं। दिनेश अग्रवाल को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए इसरो से तीन बार टीम उत्कृष्ठ अवार्ड मिले है। उनकी हिंदी लेखन एवं कार्य में विशेष रुचि है और उनकें विभिन्न तकनीकी सेमिनारों में 25 से अधिक लेख प्रकाशित हो चुके है। उन्होंने मानक अंतरिक्ष विज्ञान शब्दावली को अधतन करने एवं अंतरिक्ष विभाग द्वारा अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित मौलिक पुस्तक लेखन योजना के लिए मापदंड निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। साथ ही अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित करीबन 10 पुस्तकों की रीडिंग कर अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
दिनेश अग्रवाल ने कहा कि मेरे शहर बुरहानपुर के लिए गौरव की बात है। साथ ही माता पिता समस्त परिवार व गुरुजन का बहुत बड़ा हाथ रहा है। नई ऊंचाई तक छुआ। अपने शहर के युवा इस क्षेत्र में आगे आए।

patrika IMAGE CREDIT: patrka
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