16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बुरहानपुर में केले के रेशे से बनी टोपी साउथ अफ्रीका तक पहुंची

less than 1 minute read
Google source verification
one district one product

one district one product

  • पसंदी आईतो 10 टोपी का आर्डर दियाबुरहानपुर. जिले के विकास और खुशहाली की पहचान बन चुके केला फसल किसानों के साथ महिलाओं के जीवन में भी बदलाव ला रही है। यहां केले के रेशे से बनी टोपी अब साउथ अफ्रिका तक पहुंच गई। टोपी इतनी भायी की यहां से दस टोपियों का ऑर्डर दे दिया।केला फल का जिले में बंपर उत्पादन होता है। केले के पौधें से फल निकालने के बाद बचे अवशेष को फेंकने की बजाय इसका बखूबी इस्तेमाल तरह-तरह के उत्पाद बनाने के लिए किया जा रहा है। इन उत्पादों को तैयार करने में जिले की समूह की महिलाओं की भूमिका बढ़ रही है। महिलाएं अब केले के रेशे से झूमर, टोकरी, टोपी, तोरण, पेन स्टैंड, फाइल फोल्डर, झाडू, चटाई, सजावटी सामान, की-रिंग, राखियां, पर्स, घडिय़ां आदि उत्पाद बना रही है।मध्यप्रदेश डे.राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की परियोजना प्रबंधक संतमति खलखो ने बताया कि समूह की महिलाएं यह उत्पाद तैयार कर रही है। जिले में ४६ हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी है। केले फाइबर से तैयार किए जा रहे उत्पादों की मांग बढऩे लगी है। यह उत्पाद आजीविका मेले में भी विक्रय किए जाते हैं।ऐसे साउथ अफ्रीका तक पहुंची टोपीपरियोजना प्रबंधक खलखो ने बताा कि अनुसुइया दीदी को आईआईटी इंदौर द्वारा 5 किलो केले के रेशे का आर्डर दिया गया था। जिसकी आपूर्ति के लिए समूह की दीदी इंदौर गई थी। वे अपने साथ केले के रेशे से बनी टोपी भी लेकर गई थी। इस दौरान आईआईटी इंदौर में प्रोजेक्ट के लिए आए साउथ अफ्रीका के व्यक्ति को यह टोपी बहुत पसंद आई और उन्होंने 10 टोपी का आर्डर भी दिया है।