5 मार्च 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Iran-Israel War: एमपी के बुरहानपुर का खाड़ी देशों से व्यापारिक खास रिश्ता, युद्ध से होगा करोड़ों का नुकसान

देश सहित विदेशों तक केले का सप्लाय युद्ध का असर,चिंता में एक्सपोर्टर Iran-Israel War : एमपी के बुरहानपुर का खाड़ी देशों से व्यापारिक रिश्ता है। हर साल बड़ी मात्रा में केले का सप्लाय ईरान से लेकर सऊदी अरब, ओमान, यमन, दुबई और इराक सहित अन्य खाड़ी देशों में केला एक्सपोर्ट होता है। वर्तमान में चल […]

2 min read
Google source verification

देश सहित विदेशों तक केले का सप्लाय

युद्ध का असर,चिंता में एक्सपोर्टर

Iran-Israel War : एमपी के बुरहानपुर का खाड़ी देशों से व्यापारिक रिश्ता है। हर साल बड़ी मात्रा में केले का सप्लाय ईरान से लेकर सऊदी अरब, ओमान, यमन, दुबई और इराक सहित अन्य खाड़ी देशों में केला एक्सपोर्ट होता है। वर्तमान में चल रहे ईरान, इजराइल,अमेरिका के युद्ध के चलते इसका असर केला उत्पादक किसानों के व्यापारियों पर भी देखने को मिलेगा।

देश सहित विदेशों में भी बुरहानपुर के केले की मिठास को पसंद किया जाता है। महाराष्ट्र की सीमा से लगा होने से विदेशी बाजारों में केले की खपत अधिक है। सीमा से लगे महाराष्ट्र के जलगांव, रावेर,सावदा, नासिक से माल पैकेजिंग के साथ सीधे कंटेनरों से विदेशों तक पहुंचता है। किसान अच्छा क्वालिटी का केला एक्सपोर्ट के लिए पसंद करते है, क्योकि इसकी डिमांड सऊदी अरब, ओमान, यमन, दुबई,से लेकर इराक और ईरान तक रहती है। कसान दो सीजन में अलग,अलग मौसम में केला के बागिचे लगाकर केला के क्वालिटी को सप्लाय के लिए तैयार किया जाता है।

इस क्वालिटी की डिमांड

जिले में जी-9, बसराई सहित अन्य शामिल है। पहला सीजन जून से जुलाई से शुरू होकर अप्रेल, जून तक तैयार होता है। दूसरे सीजन के बाग फरवरी से मार्च में लगते है जो अक्टूबर तक चलते है। क्योंकि समय बाज़ार में केले की अच्छी मांग होने से निर्यात के लिए समय मिल जाता है। हर साल अफगानिस्तान के साथ तुर्की, बहरीन, दुबई में केला पहुंच रहा है।

करोड़ों का केला एक्सपोर्ट

केले के भाव उत्पादन और क्वालिटी को देखकर निर्धारित किए जाते है। अगर अच्छी क्वालिटी के साथ बिना किसी बीमारी ग्रस्त केला रहता है तो इसकी बाजार में डिमांड रहती है। बाग देखकर एक्सपोर्ट किसानों से अधिक भाव में केले की खरीदी करते है। वर्तमान में जिले में अभी केले का उत्पादन नहीं है। ऐसे में नए सीजन के बाग तैयार होने से तक युद्ध खत्म होने की संभावना रहेगी। वर्तमान में अभी केले की कमी है, ऐसे में महाराष्ट्र से ही सप्लाय कंटेनर चल रहे है।

विदेशों तक ऐसे पहुंचता है केला

बड़े केला गु्रप से एक्सपोर्टर संपर्क में रहते है। जिले में जिस बाग में अच्छी क्वालिटी रहती है उसे पहले ही एक्सपोर्ट के लिए चयन कर लिया जाता है। किसान से रेट तय होने के बाद कटाई कर बॉक्स या ट्रक से नासिक भेज दिया जाता है। नासिक में केले की पैकेजिंग कर कंटेनर के लिए मुंबई बोर्ट पर भेजा जाता है। जहां से डिमांड के अनुसार एक्सपोर्ट किया जाता है। केले की लंबाई, वजन से लेकर मोटाई मायने रखती है। विदेश नहीं जाने वाला केला देश के पंजाब, हरियाण, दिल्ली, यूपी सहित अन्य राज्यो में सप्लाय होता है।

  • ईरान,सऊदी,इराक सहित सभी खाड़ी देशों में बुरहानपुर का केला एक्सपोर्ट होता है। वर्तमान में बाग तैयार नहीं है, ऐसे में अप्रेल के बाद एक्सपोर्ट शुरू होगा। अगर युद्ध लंबा चलत है तो सभी को इसका नुकसान होगा।राजेंद्र चौकसे, केला, एक्सपोर्टर