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रोचक खबर : अमरीकी किताब पर बुरहानपुर के शिक्षक का शोध, दस साल लगे

- 16 साल पुरानी अमरीकी किताब पर दस साल में पूरा किया शोध- शहर के शिक्षक ने हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी में किया शोध- जज्बा

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 Interesting news: Research on Burhanpur teacher on the American book, it took ten years

Interesting news: Research on Burhanpur teacher on the American book, it took ten years

बुरहानपुर. कहते हैं जब कोई काम मेहनत और लगन से किया जाए तो मंजिल दूर नहीं लगती। यही किया शासकीय उर्दू स्कूल के शिक्षक डॉक्टर अशफाक अहमद खान ने। जब ९६ साल पुरानी अमरीकी किताब पर शोध का काम शुरू कर दिया, तो पहले उन्हें लगा की बहुत कठिन काम हाथ में ले लिया। कई परेशानियां सामने आई। इंदौर से लेकर दिल्ली तक की लाइब्रेरी की खाक छानने के बाद दस साल में शोध पूरा हो सका।
डॉक्टर अशफाक कहते हैं कि समाज में अपने व्यक्तित्व को स्थापित करने के लिये एक ही मार्ग है, और वह है शिक्षा। शिक्षा के बिना व्यकित का जीवन अंधेरे समान है, ऐसे लोग जिन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की है, उनका जीवन सदैव चौमुखी विकास के पथ पर अग्रसर होता है उन्हें शिक्षा से लाभ जीवन के अन्त तक प्राप्त होता है। खान ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में अपना पीएचडी शोध के लिए रजिस्टर््ेशन करवाया था जिसका विषय उर्दू डायजेस्टो की अहमितयत और चंद एहम डायजेस्टों का तहकीकी और तंकीदी जायजा था । इस शोध को पूर्ण करने के लिये शौधकर्ता को अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू में प्रकाशित होने वाले डायजेस्टो को एकत्रित करना पड़ा जो कि बहुत कठिन कार्य था, अंग्रेजी का सबसे पहला डायजेस्ट इंग्लिश रीडर्स डायजेसट जो कि 1922 में यूएसए से प्रकाशित हुआ और आज तक प्रकाशित हो रहा है। यह डायजेस्ट आज 150 से अधिक देशों से एक साथ प्रकाशित होता है। भारत में इसका प्रकाशन आजादी के बाद 1954 से हुआ जिसकी लगभग 50 लाख से अधिक कापियां केवल भारत में प्रिन्ट व वितरित की जाती है, इसमें प्रसिद्ध नाविल, अफसाने, कहानियां, राजनेता, अभिनेता, लेखकों, पर्यावरण तथा स्वास्थ्य संबंधी आदि लेख प्रकाशित होते है। यह विश्व स्तरीय लोकप्रिय डायजेस्ट है। दुनिया भर के डायजेस्ट एकत्रित करने के लिये शोधकर्ता को समय के साथ साथ धन भी अधिक खर्च करना पड़ा। पुराने से पुराने डायजेस्ट प्राप्त करने के लिये जहां दूर दूर तक लायब्रेरीयों की खाक छानना पड़ी वही पुराने रीडर्स से भी संपर्क करना पड़ा ।
हिन्दी में प्रकाशित होने वाले डायजेस्ट नवनीत, सर्वोत्तम, ताहा, पर्यावरण आदि डायजेस्टों की अपनी अलग लोकप्रियता है। भारत में हिन्दी में सर्वप्रथम डायजेस्ट का प्रकाशन 1952 में नवनीत के रूप में हुआ । हिंदी के डायजेस्टों में भी अंग्रेजी डायजेस्ट से मिलते जुलते आर्टिकल प्रकाशित होते हैं, हिंदी डायजेस्ट में इसके अतिरिक्त महाभारत, रामायण, गीता, तथा महाकाव्य आदि की जानकारी भी समय समय पर त्यौहारों के अनुरूप प्रकाशित होती रहती है, 1947 में एक बहुत बड़ी तरासदी हुई जिसमें दो देश भारत और पाकिस्तान वजूद में आये विश्व स्तर पर उर्दू डायजेस्टों का आरंभ हिन्दुस्तान की आजाद के बाद 1960 में लाहौर पाकिस्तान से उर्दू डायजेस्ट के रूप में हुआ । भारत में उर्दू डायजेस्ट का आरंभ 1964 में हुमा के रूप में हुआ जिसके एडीटर व बानी मरहूम मौलाना वहीदउददीन सिददकी थे। उर्दू डायजेसट हुमा की मकबूलियत का यह आलम है कि इसकी पॉच लाख से अधिक कापियां देशभर में वितरित होती है और प्रत्येक कॉपी 400 से 650 पेज पर आधारित होती है । समय समय पर विशेषांक भी निकाले जाते है । हुमा के अतिरिक्त हुदा, चहाररंग, सदहारंग, शाहकार, मेहराब निकहतेगुल, नया आलमी डायजेस्ट, शबिस्तां, जिकरा, मेहराब, बतूल, अलहसनात, नूर, हया, हदफ, रहनुमाये जिन्दगी आदि इस प्रकार कुल 33 प्रकार के डायजेस्टोंं की लगभग 500 से अधिक प्रतियां का अध्ययन करके शोधकर्ता ने अपना शोध पूर्ण किया है । वर्तमान में अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप का एक प्रसिद्ध लेख बिजनेस पर आधारित इंग्लिश रीडर डायजेस्ट में प्रकाशित हुआ था जो बिजनेस करने वालें लोगों के लिये कम समय में बिजनिस को बढावा देने और सफल बिजनिसमेन बनने के लिए एक प्रेरणादायक था । इस आर्टीकल को पढने के बाद गई लोगों ने बिजनिस में सफलता पाई है । उर्दू डायजेस्टों में गजल, नगमे, हम्द, नात, गीत कहानी, अफसाने, अकवाले जर्रीन, किश्तवार नावेल र्डमें शिकारयात, स्वास्थ्य, किचन के पकवान, कारीन के खूतूत, तबसेरा, लतीफे, बच्चों नौजवानों और वृद्ध सभी के लिये उनकी दिलचस्पी का मवाद शामिल किया जाता रहा है यह मटेरियल डायजेस्टों की मकबूलियत में चार चांद लगा देते है । उर्दू डायजेस्टों में निरन्तर लिखने वाले लेखों में इब्ने शफी, एम.ए.राहत, नजमा मोदी,एम.इकबाल, आदि है ।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय व्दारा डॉक्टर अशफाक को इस किताब पर शोध करने पर पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया । डॉं0 मुजफ्फर हनफी नईदिल्ली, डॉ0मेहबूब राही आकोला, डॉं0 सफदर रजा खंडवी, डॉं0 एस.एम.शकील बुरहानपुर, डॉं0 उस्मान अंसारी, डॉं0शेख मुसा, डॉं0 हबीब राहत हुबाब, डॉं0 समद भोपाली, डॉं0 जाकिर हुसैन इंदौर, डॉं0नाजनीन इन्दौर डाक्टर बिल्किस कलकत्ता, डॉं0 गुलाम दस्तगीर शौलापुर, सुफियान काजी, ओर सभी रिश्तेदार, दोस्त शिक्षकों व्दारा मुबारकबाद दी गई।

यह बोले शहरवासी
किसी भी विषय में शोध करना कोई आसान काम नहीं होता यह कार्य लोहे के चने चबाना जैसा होता है । श्री अशफाक खान व्दारा इस कार्य को पूर्ण कर पी.एच.डी.की उपाधि प्राप्त की गई । मैं उन्हें अपनी ओर संघ की ओर से बधाई देता हूं। - राजेश साल्वे, अध्यक्ष-शास.अध्यापक संघ

अशफाक खान व्दारा किया गया शोध आलमी स्तर का नया और अछूता है, मैं उन्हें उनकी कड़ी मेहनत और पी.एच.डी.की उपाधि मिलने पर दिल की अमीक गहराईयों से मुबारकबाद पेश करता हूं।
- प्रोफेसर डॉ0मुजफ्र हनफी, नई दिल्ली

शिक्षा एकमात्र ऐसा साधन है जिसे हासिल करने से तरक्की के नये नये रास्ते खुलते है। अशफाक खान का प्रथम शोध केंद्र आई.के.कॉलेज इन्दौर ओर गाईड डॉं0 अजीज इन्दौरी थे, डॉं0 अजीज इन्दौर के इन्तेकाल के बाद शोध केन्द्र सेवा सदन कॉलेज बुरहानपुर हुआ । मैंने देखा कि खान ने अपना शोध खूब मेहनत और लगन से पूर्ण किया । पी.एच.डी.की उपाधि मिलने पर मैं आई.के.कॉलेज के समस्त स्टाफ की ओर से मुबारकबाद देता हूॅ । - डॉं0जाकिर हुसैन प्राचार्य आई.के.कालेज इन्दौर

डॉं0 अजीज इन्दौरी के इंतेकाल के बाद शेष शोध को पूर्ण करने के लिये देवी अहिल्या विश्वविद्यालय व्दारा मुझे गाईड नियुक्त किया गया मैनें देखा कि यह शोध बिल्कुल नया और अछूता है इस शोध से जुबानों के फरोग में नया इजाफा होगा। मैं अपनी और सेवा सदन कॉलेज के समस्त स्टाफ की ओर से अशफाक अहमद खान को पी.एच.डी.उपाधि मिलने पर मुबारकबाद देता हूं। - डॉं0एस.एम.शकील एच.ओ.डी.उर्दू पर्शीयन विभाग बुरहानपुर

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु इस प्रकार के शोध लाभदायक सिद्ध होंगे। शोधकर्ता व्दारा की गई मेहनत का यह परिणाम है श्री अशफाक अहमद खान को पी.एच.डी.की डिग्री मिलने पर शिक्षा विभाग के स्टाफ की जानिब से हार्दिक बधाई । - श्री आर एल उपाध्याय, जिला शिक्षा अधिकारी बुरहानपुर

हिन्दुस्तान की बड़ी बड़ी लायब्रेरियों की खाक छान्ना, पुराने रीडर से सम्पर्क करना, कोई आसान काम नहीं था इसके बाजवूद मेहनत व लगन से पी.एच.डी.की उपाधि मिलने पर अशफाक खान को बहुत बहुत मुबारकबाद । - डॉं0 सफदर रजा खण्डवी वरिष्ठ साहित्यकार

डॉक्टर अशफाक अहमद खान को पी.एच.डी. की उपाधी मिलने पर डॉ.मो.इमरान खान, जिला अध्यक्ष वक्फ बोर्ड बुरहानपुर, सै.इमादुद्दीन चेयर मेन मदरसा बोर्ड भोपाल, हिदायत उल्ला, गुड्डु मौलाना, डॉ. जावीद, डॉ.फरीद काज़ी, डॉ.नदीम, डॉ. आबिद अली, ठाकुर विरेन्द्र सिंह, ठाकुर सुरेन्द्र सिंह, किषोर पाटिल, मुकेष शाह, मनोज तारवाला, उस्ताद लतीफ शाहिद, डॉ.असलम खान, डॉ. ऐह

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