
पं. प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा का अंतिम दिन आज, यहां 80 हजार लोग रोज कर रहे भोजन
बुरहानपुर. पंडित प्रदीप मिश्रा सीहोर वालों की संगीतयम श्रीमद्भागवत कथा का गुरुवार को अंतिम दिन है, बुरहानुपर मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की बार्डर स्थित है, इस कारण यहां उनकी कथा सुनने के लिए आस्था का सैलाब उमड़ रहा है, इसका सीधा उदाहरण इस बात से पता चल रहा है कि यहां हर दिन करीब 80 हजार लोगों का भोजन बन रहा है। ऐसे में जहां एक तरफ धर्म की गंगा बह रही है, वहीं दूसरी तरफ हर दिन भंडारे में लोग प्रसादी का आनंद ले रहे हैं।
जहां आस्था होती है वहां स्वार्थ नहीं होता है और जहां सच्ची भक्ति निस्वार्थ भावना से की जाती है वहां इश्वर की कृपा रहती है। इश्वर के यही असीम कृपा पाने के लिए रोज 500 लोग 70 से 80 हजार लोगों को प्रतिदिन भोजन करा रहे हैं। यह सेवा भावना शिव महापुराण कथा की भोजशाला में देखने को मिल रही है। कृषि उपज मंडी प्रांगण में 3 से 9 फरवरी तक श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा श्रवण के लिए प्रतिदिन लाखों भक्त पहुंच रहे हैं। रेणुका माता मंदिर के पास ही भोजन शाला बनाई गई है।
पांच हजार लीटर के बगोने में बन रही सब्जी
भोजन में व्यवस्था में जुटे 78 वर्षीय अधिवक्ता ज्ञानेश्वर मोरे बताते हैं कि प्रमुख रूप से गिरिश शाह, पप्पु सेठ, मुकेश देवड़ा, नाना दीक्षित नेपानगर वाले आदि भोजशाला संभाल रहे हैं। 2 तारीख से हम लोग लगे हैं। शहर के लोग हर प्रकार से सहयेग कर रहे हैं। 25 गांव से रोटियां मिली है। कभी 10 क्विंटल तो कभी 20 तो कभी 50 क्विंटल की रोटी आ रही है। हादरपुर गांव भी उत्कृष्ठ कार्य कर रहा है। यहां की 250 से अधिक महिला पुरुषों की टीम 12 से 14 घंटे सेवा में जुटी है, बर्तन धो रहे हैं। भक्तों को भोजन परोसने की व्यवस्था में लगी है यह पूरा काम अनुशासन से किया जा रहा है।
जबलपुर से लोहा व्यापारी ने संभाली जिम्मेदारी
जबलपुर से लोहा व्यापारी निस्वार्थ भाव से यहां सेवा दे रहे हैं। सतिश राय बताते हैं कि वे दद्दाजी का शिष्य है। दद्दाजी के भंडारे में सेवा का काम करता रहा। पूरी 150 लोगों को लेकर आया हूं। मेरा सहयोग यहां के दयाल भैया कर रहे हैं। रोज दाल, चावल, सब्जी पुड़ी, रोटी सुबह का नाश्ता बना रहे हैं। प्रतिदिन 70 से 80 हजार के करीब लोग भोजन करते हैं। हजारों की संख्या में आ रहे भक्तों के भोजन बनाने की व्यवस्था करना आसान नहीं थी। इसलिए इंदौर से बर्तन बुलवाना पड़े। चार बगोने इंदौर से आए हैं। एक में 5 हजार लीटर तक सब्जी बन रही है। भोजन व्यवस्थापक विनोद रमेश चौकसे ने बताया कि गांव गांव से महिलाएं सेवा देने आ रही है।
कृषि उपज मंडी प्रांगण में चल रही श्री शिव कथा महापुराण के छठवें दिन पंडित मिश्रा ने कहा कि गिदद् और कव्वा ऊंचा उड़कर भी मांस (बुराई) पर नजर रखते हैं और हंस कम ऊंचाई पर उड़कर भी मोती पर निगाह रखता है, यही अंतर है विद्यावान, विद्वान में। रावण विद्वान था और हनुमान जी विद्यावान। विद्यावान विनम्र होकर चलता है जबकि विद्वान अहंकारी होकर अपने ही विनाश का मार्ग प्रशस्त करते हैं। विद्यावान गुरू की शरण लेता है तो विद्वान अपने ज्ञान बघारता है। शिव महापुराण कथा के छठवें दिन वन मंत्री कुंवर विजय शाह भी मौजूद रहे।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि सनातन संस्कार कितने मजबूत और अच्छे रहे इस बात से समझ आता है कि जब हमारे पूर्वज अर्थात् आपके सास.ससुर बाजार से कोई घर का सामान लाते थे तो वह एक या दो नहीं बल्कि 6-12 पूरा सेट लेकर आते थे। जब से आज की युवा पीढ़ी ने बस एक या दो, हम दो हमारे दो को अपनाया है तब से रो.रो और रो का वातावरण बना है। न जाने आज का समाज यह क्यों नहीं समझ रहा है कि हम दो हमारे दो से समाज का नुकसान ही अधिक हो रहा है। जब तक शिव की कृपा नहीं होती तब तक हम चाहकर भी शिवालय तक नहीं पहुंच सकते।
Published on:
09 Feb 2023 10:41 am
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