
बुरहानपुर. श्रीगोवर्धनमठपुरी के वर्तमान 145वें जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंदजी सरस्वती महाराज जिनसे आधुनिक युग के सर्वोच्च वैधानिक संगठनों संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व बैंक तक ने मार्गदर्शन प्राप्त किया है वे बुरहानपुर में आ रहे हैं। सोमवार शाम ६.३० बजे कुशी नगर एक्सप्रेस से आएंगे। इनकी स्वागत शोभायात्रा कृष्ण मंगल परिसर तक होगी। इसे लेकर समाजजनों ने तैयारी पूरी कर ली है।
श्री ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्री गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती पहली बार बुरहानपुर आएंगे। इसे लेकर वैश्य समाज तैयारियां कर रहा है। समिति प्रमुख पवन लाठ और रिंकु टांक ने बताया 16 दिसंबर की शाम 6.20 बजे कुशीनगर एक्सप्रेस से शंकराचार्यजी बुरहानपुर पहुंचेंगे। उसी शाम शोभायात्रा के रूप में उनका स्वागत किया जाएगा। उनके रात्रि विश्राम की व्यवस्था श्रीकृष्ण मंगल परिसर के पीछे पवन लाठ के निवास पर रहेगी। दूसरे दिन 17 दिसंबर को सुबह 10 बजे से प्रश्नावली का समय रहेगा। इसमें विविध संत.महंत सहित अन्य धर्मावलंबी अपनी जिज्ञासा दूर करने पहुंचेंगे। उसी दिन शाम 4 बजे से लालबाग रोड स्थित श्रीकृष्ण मंगल परिसर में धर्मसभा होगी। इसमें शंकराचार्यजी धर्म के प्रचार के लिए धर्मावलंबियों को जागरूक करेंगे। दूसरे दिन 18 दिसंबर की सुबह 10 बजे से दीक्षा का कार्यक्रम होगा। गुरु दीक्षा के लिए सैकड़ों भक्त बुरहानपुर पहुंचेंगे। इसी दिन शाम 6.20 बजे शंकराचार्यजी जलगांव के लिए प्रस्थान करेंगे। आयोजन के लिए ओमप्रकाश शर्मा को अध्यक्ष नियुक्त किया है।
यह आ चुके बुरहानपुर
करीब 33 साल पहले यानी 1986 में द्वारकापुरी मठ के शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वतीजी बुरहानपुर आए थे। वर्ष 1987 में कांचीपुरम मठ के शंकराचार्य स्वामी श्री जयेंद्र सरस्वतीजी रात्रि विश्राम के लिए यहां ठहरे थे। उनके बाद पहली बार पुरी मठ के स्वामी निश्चलानंद सरस्वती शहर आ रहे हैं।
संक्षिप्त जीवन परिचय
श्रीगोवर्धनमठ पुरी के वर्तमान 145वें जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंदजी सरस्वती महाराज है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने दिनांक 28 से 31 अगस्त 2000 में न्यूयार्क में आयोजित विश्वशांति शिखर सम्मलेन व विश्व बैंक ने वल्र्ड फेथ्स डेवलपमेंट डाइलोग 2000 के वाशिंगटन सम्मलेन के अवसर पर लिखित मार्गदर्शन प्राप्त किया था। विश्वशांति का सनातन सिद्धांत तथा ् सुखमय जीवन का सनातन सिद्धांत शीर्षक से सन 2000 में पुस्तक रूप में प्रकाशित किया। इसके अलावा विश्व के 200 देश चिन्हित किए गए है, जिनके वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर व मोबाइल फोन से लेकर अंतरिक्ष तक के क्षेत्र में किए गए आधुनिक अविश्कारों में उन वैदिक गणितीय सिद्धांतों का प्रयोग किया है जो शंकराचार्य महाराज द्वारा रचित स्वस्तिक गणित नामक पुस्तक में दिए गए है। इस धरा पर वैदिक सिद्धांतो की साक्षात् वेदमूर्ति है। महाराज का जन्म 72 वर्ष पूर्व बिहार प्रांत के मिथिलांचल में दरभंगा वर्तमान में मधुबनी जिले के हरिपुर बख्शिटोल नामक गांव में 1943 को हुआ।
Published on:
16 Dec 2019 12:01 pm

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