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अद्भूत है ये ताप्ती यात्रा, पूरी परिक्रमा की ऐसी है कहानी

ताप्ती का एक पाट पैदल कर आज बुरहानपुर आ रही परिक्रमा यात्रा- 17 वर्षों से चली आ रही परंपरा

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This Tapti Yatra is amazing, this is the story of the whole circumambulation

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बुरहानपुर. लगातार 17 वर्षों से चली आ रही ताप्ती परिक्रमा यात्रा 21 फरवरी को बुरहानपुर में प्रवेश कर रही है। ताप्ती परिक्रमण में शामिल भक्त ताप्ती का एक तरफ का पूरे किनारे की यात्रा कर चुके हैं, दूसरी तरफ के पाट की यात्रा करते हुए शहर में पहुंची।
राजीव पाटनकर के नेतृत्व मे यात्रा बुरहानपुर पहुंची। जिसका मार्ग गायत्री मंदीर रेणुका रोड से 2 बजे दोपहर में यात्रा प्रारंभ की जाएगी। साईं बाबा मंदिर होते हुए शिकारपुरा, सिलमपुरा, राजपुरा मेन रोड से बाई की हवेली एवं मां ताप्ती राजघाट पर भव्य आरती कर किला रोड से होते हुए फव्वारा चौक, सिटी थाना, सिंधीपुरा रोड, ट्रांसपोर्ट नगर एवं अंत मे रोकडिय़ा हनुमान मंदिर ट्रस्ट द्वारा भोजन एवं विश्राम की व्यवस्था रहेगी। मां ताप्ती के संरक्षण एवं स्वच्छता जागरूकता के उद्देश्य से निकली यात्रा का महिलाओं द्वारा यात्रा मार्ग पर रंगोली बनाकर धर्मप्रेमी जनता, समाजसेवियों द्वारा अलग.अलग स्थानों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया जाएगा।
ऐसी है पूरी यात्रा और उद्देश्य
प्रदेशभर की जीवनदायनी मां ताप्ती नदी की परिक्रमा के लिए पद यात्रा निकली है। इसके संरक्षण, शुद्धिकरण और इसके महत्व के बारे में लोगों को जानकारी देने के लिए यह यात्रा निकली है। ताप्ती परिक्रमा पदयात्रा समिति के संयोजक संजय पाठनकर ने कहा कि 2 जनवरी से यह यात्रा ताप्ती के उद्गम स्थल मुलताई से निकली है। 9.50 किमी ताप्ती का मुलताई से डुमस तक यात्रा हुई, जहां ताप्ती समुद्र में मिलती है, वहां तक एक तरफ के किनारे की यात्रा कर दूसरे ओर से भी यात्रा करते हुए भक्त बुरहानपुर आ रहे हैं।
नदी पूरी तरह शुद्ध होना चाहिए
पाठनकर का कहना है कि ताप्ती नदी पूरी तरह शुद्ध होना चाहिए। भुतकाल इस पर निर्भर रहा है वर्तमान और भविष्य भी इसी पर टिका है।

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