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ताप्ती का यह अनोखा घाट, यहां हर मंदिर शिवालय, भगवान राम के हाथों भी बनी पिंड

- सभी मंदिरों में शिव पिंड- नागझिरी घाट पर 12 शिवजी के मंदिर- महाशिवरात्रि विशेष

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This unique ghat of Tapti, every temple here has Shivalaya, Pind was also made by the hands of Lord Ram.

This unique ghat of Tapti, every temple here has Shivalaya, Pind was also made by the hands of Lord Ram.

बुरहानपुर. नदियों के तट पर आपने कई मंदिर देखे होंगे, जहां हमारी संस्कृति का भी विकास हुआ। लेकिन बुरहानपुर के बीच से गुजरी सूर्य पुत्री मां ताप्ती का नागझिरी घाट भी रामायणकाल से लेकर होलकर साम्राज्य का इतिहास संजोए हुए हैं। यह ऐसा घाट है जहां कई मंदिर नजर आएंगे और सभी शिवालय बने हुए हैं। इन्हीं के पास में प्राचीन शिव मंदिर है जहां खुद भगवान राम ने वनवास के समय यहां शिवलिंग स्थापित की थी। इसलिए इस घाट को प्राचीन घाटों में माना जाता है। जहां महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा अर्चना होगी।
मां अहिल्या ने बनवाए शिव मंदिर
ऐसे तो आपको ताप्ती के सभी घाट पर प्राचीन शिव मंदिर मिल जाएंगे। लेकिन नागझिरी घाट पर पूरे 12 शिव मंदिर बने हैं। बताया जाता है कि यह मंदिर मां अहिल्या बाई होलकर ने स्थापित किए। कई मंदिर तो अब भी यहां अपनी प्राचीन सभ्यता और कलात्मकता को दर्शाते हैं, लेकिन कुछ मंदिरों की हालत इतनी जीर्णशीर्ण है कि भक्तों की आस्था को ठेंस पहुंचती है। भक्त प्रवीन नाविक बताते हैं कि इनके जर्णोद्धार के लिए कई बार मांग की जा चुकी है। कई भक्त यहां पूजन के लिए आते हैं।

इसलिए भगवान राम ने स्थापित की शिव पिंड
प्राचीन कथाओं के अनुसार भगवान श्री राम वनवास के दौरान बुरहानपुर जिले से भी गुजरे थे। ताप्ती नदी के नागझिरी घाट पर उनके पिता महाराज दशरथ का श्राद्ध कर रेत की शिवपिंड बनाई थी। पूजन कर वह आगे की ओर निकले थे। इसलिए इस मंदिर का नाम रामेश्वर पड़ा। प्रदीप नाविक ने बताया कि मंदिर का रंग रोगन किया गया है। बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने आएंगे।

बुरहानपुर में कई प्राचीन मंदिर
ेेऐसे तो बुरहानपुर में कई ऐसे मंदिर है जो महाभारत और रामायण काल से बने हुए हैं। जैसे की असीरगढ़ पर बना शिव मंदिर। यहां अब भी किदवंती है कि अश्वतथामा आकर आज भी यहां रोज सुबह ताजा फूल भगवान शिवजी को अर्पित करके जाते हैं। महाजनापेठ में गुप्तेश्वर मंदिर, सतियारा घाट पर बागेश्वर मंदिर, प्रतापपुरा में हाटकेश्वर मंदिर, बाइसाहब की हवेली पर एक साथ दो प्राचीन मंदिर व शाह बाजार में मंदिर प्राचीनतम है।

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