बुरे वक्त से गुजर रहे आम्रपाली समूह के बारे में कुछ चौंका देने वाले खुलासे हुए हैं। ऑडिटरों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आम्रपाली समूह द्वारा 500 से अधिक लोगों के नाम पर महंगे-महंगे फ्लैटों की बुकिंग मात्र एक रुपए, पांच रुपए या 11 रुपये प्रति वर्गफुट के भाव पर की गई थी।
नई दिल्ली। बुरे वक्त से गुजर रहे आम्रपाली समूह के बारे में कुछ चौंका देने वाले खुलासे हुए हैं। फॉरेंसिक ऑडिट ने सुप्रीम कोर्ट में आम्रपाली समूह के बारे में कुछ ऐसी बातें कहीं, जिन्हें सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। ऑडिटरों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आम्रपाली समूह द्वारा 500 से अधिक लोगों के नाम पर महंगे-महंगे फ्लैटों की बुकिंग मात्र एक रुपए, पांच रुपए या 11 रुपये प्रति वर्गफुट के भाव पर की गई थी। इतना ही नहीं, ऑडिट में यह भी सामने आया है कि आम्रपाली समूह के ड्राइवरों, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और आफिस बॉय का काम करने वालों के नाम पर 23 कंपनियां बनाई गईं थीं। ये कंपनियां आम्रपाली के गठबंधन का हिस्सा थीं और घर खरीदारों के पैसे को इधर उधर करने के लिए इनको आगे किया गया था।
फॉरेंसिक ऑडिटर्स ने किया खुलासा
फॉरेंसिक ऑडिटर रवि भाटिया ने पीठ को बताया कि आम्रपाली समूह ने आयकर विभाग के आदेश को चुनौती दी थी जिसने उस पैराग्राफ को हटा दिया जिसमें कच्चे माल खरीद के लिए 200 करोड़ रुपए के बोगस बिल और वाउचरों का जिक्र था। वहीं दो अन्य फॉरेंसिक आडिटरों ने बताया कि उनके सामने 655 ऐसे लोगों के नाम आए हैं जिनके नाम पर फ्लैट की 'बेनामी' बुकिंग की गयीं। उनके 122 पतों पर वैसा कोई व्यक्ति नहीं मिला। इसके साथ ही फॉरेंसिक ऑडिटर पवन कुमार अग्रवाल ने अदालत को बताया कि, 'मार्च 2018 तक वाधवा के खाते में 12 करोड़ रुपए थे। उसके बाद उन्होंने एक करोड़ रुपए अपनी पत्नी के नाम स्थानांतरित किए और 26 अक्टूबर को अदालत के समक्ष पहली बार पेश होने से तीन दिन पहले उन्होंने 4.75 करोड़ रुपए अज्ञात लोगों को स्थानांतरित किए।' इस मामले पर अदालत ने वाधवा की खिंचाई की और उनके खिलाफ अवमानना की चेतावनी भी दी।
जेपी मॉर्गन रीयल एस्टेट भी फंसी
इसके अतिरिक्त शीर्ष अदालत ने जेपी मॉर्गन रीयल एस्टेट को भी इस मामले में आड़े हाथ लेते लिया। दरअसल जेपी मॉर्गन ने 2010 में आम्रपाली जोडिएक में उसके शेयरों की खरीद के जरिए 85 करोड़ रुपए का निवेश किया था। लेकिन बाद में इन शेयरों को रीयल्टी कंपनी की सहायक कंपनियों को बेच दिया गया था। इस संदर्भ में फॉरेंसिक ऑडिटरों ने कहा कि जेपी मॉर्गन रीयल एस्टेट फंड और आम्रपाली समूह के बीच शेयर खरीद करार कानून के प्रावधानों का उल्लंघन था। पीठ ने कहा कि अगर अदालत को इस मामले पर जवाब नहीं मिलता है तो गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) इस मामले को देखेगा।
24 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसंबर को दो फॉरेंसिक ऑडिटरों को करीब 3,000 करोड़ रुपए इधर उधर करने की जांच करने को कहा था। यह फ्लैट खरीदारों का पैसा था जो आम्रपाली समूह ने कथित रूप से अपनी सहयोगी कंपनियों के शेयर खरीदने और संपत्ति बनाने पर खर्च किया था। आम्रपाली समूह द्वारा लाखों लोगों को ठगा गया है। इन लोगों को राहत देने के लिए पीठ ने पक्षों और नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों से उनके फ्लैटों के पंजीकरण के लिए कानूनी सुझाव मांगे हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 24 जनवरी को होगी।
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