
देसी बाजार में सोने की कीमत आयात कीमत से अधिक हो गई है। इससे डोर (अप्रसंस्कृत सोने) का आयात बढ़ा है और इस धातु की रिफाइनरियों ने परिचालन शुरू कर दिया है। देश में एक पखवाड़े पहले सोना आयातित कीमत से 1 से 5 फीसदी कम दाम पर बिक रहा था। यह डिस्काउंट अब खत्म हो गया है और कीमत आयातित लागत से थोड़ी अधिक बोली जा रही है।
इस साल मार्च से रिफाइनिंग का कारोबार लगभग बंद हो गया था, क्योंकि रिफाइनिंग के बाद सोने की बिक्री फायदेमंद नहीं थी। अब कीमतें नरम पड़ रही हैं और मांग सुधरी है। उत्तराखंड जैसे उत्पाद शुल्क मुक्तजोन की रिफाइनरी सितंबर से चालू हो गई थीं, क्योंकि उन्हें एक फीसदी अतिरिक्तकर लाभ मिलता है। खुले बाजार में रिफाइंड सोने पर छूट भी घटकर एक फीसदी से कम रह गया है। सोने पर डिस्काउंट खत्म होने से अन्य क्षेत्रों की रिफाइनरी भी अक्टूबर में चालू हो गई हैं। इस वजह से अक्टूबर में आयात पिछले महीनों की तुलना में दोगुने से अधिक रहेगा।
जीएसटी की दर तय करते समय करों के वर्तमान स्तर और आभूषण बिक्री की बड़ी राशि के लेनदेन की प्रकृति को ध्यान में रखा जाना चाहिए। जीएसटी की ऊंची दर से इस क्षेत्र में अवैध कारोबार बढ़ेगा और सर्राफा और आभूषण क्षेत्र में वृद्धि की संभावनाएं कमजोर पड़ेंगी। उनके एसोसिएशन ने सरकार से कहा है, 'जब आभूषण कारोबार में अवैध कारोबार बढ़ेगा तो उनकी कच्चे माल की खरीद भी अवैध बाजार से होगी।
इससे रिफाइनिंग और सर्राफा कारोबार के वैध उद्योग की कारोबारी संभावनाओं को भारी चोट पड़ेगी। 10 फीसदी आयात शुल्क से पहले ही कारोबार का एक बड़ा हिस्सा ग्रे मार्केट में तब्दील हो चुका है और आभूषणों पर जीएसटी की ऊंची दर से स्थिति और विकराल होगी।
Published on:
25 Oct 2016 09:23 am
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