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2023-24 में 6% की दर से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था: नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि 2023-24 में 6% की दर से भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तर अमरीका और यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं में एक साथ मंदी आने वाले समय में बड़े जोखिम सामने आएंगे।

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India's economy to grow at 6 pc in 2023-24: Former Niti Aayog Vice Chairman Rajiv Kumar

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि "भारत के पास पिछले 8 सालों के दौरान किए गए सुधारों के कारण उच्च विकास दर के साथ बने रहने का एक अच्छा अवसर है। हम 2023-24 में 6% की वृद्धि हासिल करने में सफल रहेंगे।" हालांकि उन्होंने कहा कि "अनिश्चित वैश्विक स्थिति के संदर्भ में कई नकारात्मक जोखिम हैं। हमारे निर्यात प्रयासों का समर्थन करने के लिए डिजाइन किए गए सावधानीपूर्वक नीतिगत उपायों के माध्यम से इनसे निपटना होगा और साथ ही घरेलू स्रोतों के साथ-साथ विदेशी स्रोतों से निजी निवेश के प्रवाह में सुधार करना होगा।"

इसके साथ ही राजीव कुमार ने कहा कि रिजर्व बैंक ने 2023-24 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो मोटे तौर पर संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण के अनुमान के अनुरूप है।

उच्च महंगाई दर के सवाल का भी नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ने दिया जवाब
उच्च महंगाई दर के सवाल का जवाब देते हुए राजीव कुमार ने कहा कि रिजर्व बैंक की ओर से कहा गया है कि वह सुनिश्चित करेंगे कि मुद्रास्फीति (महंगाई दर) को नियंत्रण में लाया जाए। RBI ने वर्तमान फाइनेंशियल ईयर के लिए उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति (CPI) के अनुमान को 6.7% से घटाकर 6.5% कर दिया। पिछले महीने जनवरी में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति 6.52% थी।

भारत चीन को अधिक उत्पाद कर सकता है निर्यात
चीन के साथ भारत के बढ़ते व्यापार घाटे पर सवाल का जवाब देते हुए राजीव कुमार ने सुझाव दिया कि नई दिल्ली को चीन के मार्केट में अधिक अवसर और पहुंच स्थापित करने के लिए बीजिंग के साथ फिर से जुड़ना चाहिए। कई उत्पाद हैं जो भारत चीन को अधिक निर्यात कर सकता है।

बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी आवश्यक
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद खड़े हुआ अदाणी संकट के सवाल का जवाब देते हुए राजीव कुमार ने कहा कि "बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी आवश्यक है। मुझे नहीं लगता कि एक निजी पारिवारिक कंपनी के साथ इस तरह की एक घटना से उस प्रयास में बाधा आएगी। बड़ी संख्या में निजी क्षेत्र की कंपनियां हैं जिन्होंने अतीत में बुनियादी ढांचे के विकास में भाग लिया है और आगे भी ऐसा करना जारी रखेगी।"