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अब नोट पर नजर आएगी बिहार की भाषा, जानिए क्यों?

प्रधानमंत्री कार्यालय ने क्वाइंस एंड करेंसी डिवीजन को नोट पर अंकित होने वाले वाक्यों को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में लिखने का निर्देश जारी किया है। 

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pawan kumar pandey

Mar 16, 2016

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भारतीय नोटों पर अब जल्द ही बिहार की स्थानीय भाषा मैथिली की भी उपस्थिति दर्ज होगी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने क्वाइंस एंड करेंसी डिवीजन को नोट पर अंकित होने वाले वाक्यों को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में लिखने का निर्देश जारी किया है। मैथिली के साथ-साथ मणिपुरी, संथाली, डोंगरी और बोडो को भी स्थान मिलेगा।

मैथिली भाषा के जानकार जानकारी सुभाष चौधरी ने वित्त मंत्री और आरबीआई गवर्नर को 25 जनवरी 2014 को आग्रह किया था कि मैथिली को भी नोटों पर जगह दी जानी चाहिए। जिसे पीएमओ के अनुमोदन के लिए भेजा गया था।

अब तक 17 भाषाएं छपती थीं
फिलहाल भारत के नोटों पर 22 में से केवल 17 भाषाओं का ही प्रयोग होता है। मैथिली, संथाली, डोंगरी और बोडो को आठ जनवरी 2004 में में आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। लेकिन आरबीआई ने इन्हें नोटों पर जगह नहीं दी थी। यहां तक की 1992 में आठवीं अनुसूची में शामिल मणिपुरी भाषा को भी जगह नहीं दिया गया जबकि इसके साथ की कोंकणी भाषा की नोटों पर छपाई होती थी।

सभी भाषाओं को मिलना चाहिए एक सा सम्मान
पीएमओ से जारी नोट में कहा गया है कि, 'भारतीय रुपए का नोट हमारी संप्रभुता और गर्व का प्रतीक है। इस पर संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाओं को एक समान जगह मिलनी चाहिए और उनका सम्मान होना चाहिए।'