
Indian money in foreign bank accounts
कई सालों से भारत के कई अमीरों ने टैक्स से बचने, अपने पैसे को छिपाने और दूसरी कुछ अन्य वजहों से अपना काफी सारा पैसा विदेशी खातों में जमा कराया हुआ है। अक्सर ही इसकी चर्चा भी होती है, पर उस चर्चा का कुछ परिणाम नहीं होता। पर अब इसमें बदलाव आ रहा है। अब देश के कई अमीरों ने विदेशी खातों में जमा अपने पैसे को वापस भारत लाना शुरू कर दिया है।
क्या है वजह?
मन में सवाल आना लाज़िमी है कि आखिर क्यों कई भारतीय विदेशी खातों में जमा अपने पैसे को वापस देश ला रहे हैं? इसकी वजह है कि कई विदेशी बैंक अब भारतीय ग्राहकों से अपने बैंक खाते बंद करने का निवेदन कर रहे हैं। इसकी वजह है कई बैंकों ने विदेशी ग्राहकों के लिए मिनिमम बैलेंस की राशि बढ़ा दी है। साथ ही आरबीआई ने भी विदेश में इनएक्टिव फंड्स रखने पर नकेल कसी है। इन कारणों से इंटरनेशनल बैंक भारतीयों के बैंक अकाउंट्स बंद कर रहे हैं।
180 दिन में निवेश करना या वापस लाना ज़रूरी
पिछले दो महीने में ब्रिटेन के दो बड़े बैंकों, स्विट्रज़लैंड के एक बैंक और यूएई के एक बड़े बैंक ने दो दर्जन से ज़्यादा भारतीयों के खाते बंद कर दिए हैं। आरबीआई के नियमों के मुताबिक विदेशी अकाउंट्स में यूं ही पड़े फंड को 180 दिन में निवेश करना या वापस लाना ज़रूरी है।
इस वजह से बंद हो रहे खाते
आरबीआई की लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत सालभर में 2.5 लाख डॉलर तक विदेश में निवेश किया जा सकता है। लेकिन कुछ बड़े विदेशी बैंकों ने मिनिमम बैलेंस 10 लाख डॉलर कर दिया है। एलआरएस की सीमा के कारण भारतीय ज़्यादा पैसा विदेश नहीं भेज पा रहे हैं। इस कारण विदेशी बैंक उनके खाते बंद कर रहे हैं। साथ ही विदेशी बैंकों को फीस के रूप में होने वाली इनकम भी कम हुई है। इससे उन भारतीयों की मुश्किल बढ़ गई है जिनका विदेशों के बैंकों में खाता है। एलआरएस के नए नियमों के मुताबिक अनलिस्टेड डेट सिक्योरिटीज़ में निवेश की अनुमति नहीं है। ऐसे में कई लोग कोई जोखिम नहीं लेना चाहते हैं और विदेशी खातों में यूं ही पड़ी रकम को वापस ला रहे हैं।
Published on:
30 Dec 2023 11:20 am

