
किराएदार को रेंट एग्रीमेंट साइन करना बहुत ही जरूरी होता है। इस एग्रीमेंट में नियम और रेगुलेशन मेंशन होते हैं, जो दोनों पार्टी को लीगली जोड़ते हैं। इस डॉक्यूमेंट में दोनों पार्टी से जुड़ी सभी तरह की जानकारी दर्ज होती है और दोनों को डॉक्यूमेंट के नियमों का पालन करना होता है। कई बार पैसा बचाने के लिए एक मौखिक समझौते पर पहुंच जाते हैं। कई बार किरायानामा तो बनवा लिया जाता है लेकिन फीस बचाने के लिए इसका रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जाता है। ऐसे में जोखिम की आशंका बढ़ती है। इसे रजिस्टर करवाना फायदेमंद होता है।
इसमें लिखी शर्त के अनुसार किराएदार से तय समय पर किराया ले सकते हैं। शर्त की पालना नहीं करने पर मकान खाली करवा सकते हैं। विवाद की स्थिति में यह सबसे महत्त्वपूर्ण साक्ष्य है, जिसे कोर्ट में पेश किया जा सकता है।
इसमें लिखी शर्त के अनुसार ही मकान मालिक किराया बढ़ा सकता है। मकान मालिक शर्त के अनुसार किसी तरह की सुविधाओं में कटौती नहीं कर सकता है। किसी तरह के विवाद होने की स्थिति में शर्त की पालना के लिए दोनो पक्ष कोर्ट भी जा सकते हैं।
-संदीप लुहाडिय़ा, एडवोकेट
Published on:
18 Aug 2024 01:59 pm
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