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कड़वा सच, कॉरपोरेट कंपनियों में इस साल 26 प्रतिशत बढ़े यौन उत्पीडऩ के मामले

पिछले एक साल में निफ्टी 50 की दो-तिहाई कंपनियों में यौन उत्पीडऩ से जुड़ी 525 शिकायतें दर्ज हुई है। इस साल मार्च के अंत तक देखा गया कि एक साल के अंदर कॉरपोरेट कंपनियों में यौन उत्पीडऩ के मामले करीब 26 प्रतिशत तक बढ़ गए।

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Santosh Trivedi

Sep 30, 2016

पिछले एक साल में निफ्टी 50 की दो-तिहाई कंपनियों में यौन उत्पीडऩ से जुड़ी 525 शिकायतें दर्ज हुई है। इस साल मार्च के अंत तक देखा गया कि एक साल के अंदर कॉरपोरेट कंपनियों में यौन उत्पीडऩ के मामले करीब 26 प्रतिशत तक बढ़ गए। यौन उत्पीडऩ की शिकायतों के मामले में कंपनियों की इस सूची में विप्रो सबसे ऊपर है। विप्रो में पिछले एक साल में यौन उत्पीडऩ के करीब 111 मामले दर्ज हुए, आईसीआईसी बैंक में 87 केस और इंफोसिस में 62 केस दर्ज किए गए।

इंफोरमेशन टेक्रोलॉजी और बैंकिंग कंपनियों में दूसरी कॉरपोरेट कंपनियों की तुलना में करीब 80 प्रतिशत ज्यादा महिलाएं काम करती हैं। ये लगातार दूसरा साल है जब इन कंपनियों ने यौन उत्पीडऩ के आंकडे साझा किया है। कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ हुए यौन उत्पीडऩ को लेकर अलग से कानून बना है। ये आंकडे सभी कॉरपोरेट कंपनियों को बड़ा धक्का देने वाले हैं। ये कंपनियां हमेशा यौन उत्पीडऩ के बढ़ते मामलों से इनकार करती रहती हैं।

ज्यादा शिकायत का मतलब बढ़ रही जागरूकता

इस मामले में सलाहकार की भूमिका निभा रहे विशाल केडिया कहते हैं कि भारतीय कॉरपोरेट जगत की ये तस्वीर बहुत चिंताजनक है। कॉरपोरेट कंपनियों में यौन उत्पीडऩ के ज्यादा से ज्यादा मामले दर्ज होना इस बात का सबूत है कि मजबूती से इन शिकायतों को दर्ज किया जा रहा है। यौन उत्पीडऩ की शिकायतें टीसीएस और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में दोगुनी हुई है। इस वित्तीय वर्ष में टेक महिंद्रा में 26 केस दर्ज हुए हैं, इंडस्लैंड बैंक में 20 केस दर्ज हुए हैं। जिन कंपनियों से पहले कभी यौन उत्पीडऩ का मामला दर्ज नहीं हुआ था वहां अब 15 से 19 मामले तक दर्ज हुए हैं।

कई कंपनियों में निदेर्शों का पालन नहीं

एक बैंक से जुड़े प्रवक्ता ने कहा कि हमारे पास यौन उत्पीडऩ के 14 केस दर्ज हुए थे। इनमें से पांच केस विशाखा गाइडलाइन पर बनाई गई कमेटी ने रद्द कर दिए। बाकी केसेज पर गंभीरता से जांच की जा रही है। सिपला कंपनी ने बताया कि हम अपने महिला कर्मचारियों को लगातार इस विषय में जागरूक कर रहे हैं। वहीं विप्रो यौन उत्पीडऩ के सबसे ज्यादा मामले दर्ज होने को लेकर चुप्पी साधे है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी 10 से 15 प्रतिशत कंपनियां दिशा-निदेर्शों का पालन नहीं कर रही हैं। यही चिंता का विषय है। नागरिक अधिकारों की वकील वृंदा ग्रोवर कहती हैं कि अभी ये जानकारी मिली है कि यौन उत्पीडऩ की शिकायत दर्ज करने वाले मैनेजर लेवल के हैं या निचले स्तर के।

उठा रहे हैं कदम

टीसीएस कंपनी का कहना है कि ये बदलाव जागरूकता की वजह से आया है। एक प्रवक्ता ने बताया कि यौन उत्पीडऩ के मामले अचानक बढऩे का कोई खास कारण नहीं है। कंपनियों में अब पहले से ज्यादा कर्मचारी नियुक्तहो रहे हैं। कार्यस्थल पर जागरूकता फैलाने के लिए बहुत से कदम उठाए जा रहे हैं। टेक महिंद्रा ने एक बयान में कहा कि हम इस तरह की शिकायतों को बर्दाश्त नहीं कर सकते।

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