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Swiggy पर खाना 81% तक महंगा! ग्राहक का सोशल मीडिया पर बड़ा दावा, जानिए क्या है मामला

Swiggy Overcharging Issue: स्विगी के ग्राहक ने दावा किया कि ऐप पर खाना 81% तक महंगा मिला, जबकि पास के रेस्टोरेंट में वही भोजन काफी सस्ता था। सोशल मीडिया पर मामला वायरल हुआ तो स्विगी ने जवाब दिया कि कीमतों की जिम्मेदारी रेस्टोरेंट की होती है।

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भारत

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MI Zahir

Sep 08, 2025

Swiggy Overcharging Issue

स्विगी पर रेस्टोरेंट से महंगा खाना, खाने के बिल की तुलना। (फोटो: X Handle Sunder GJB.)

Swiggy Overcharging Issue: स्विगी पर खाना 81% तक महंगा (Swiggy Overcharging Issue) मिलने का मामला सामने आया है! एक ग्राहक का आरोप है कि उसके साथ गलत हुआ है, उसने पूछा है कि क्या यही सुविधा की असली कीमत है?’ कस्टमर का कहना है कि 2 किलोमीटर दूर रेस्टोरेंट का खाना (Restaurant food) ऐप पर लगभग दुगुने दाम में मिल रहा है। जानकारी इस पोस्ट ने ऑनलाइन यूजर्स के बीच खासी बहस छेड़ दी है। ग्राहक सुंदर (@SunderjiJB) ने एक्स पर रेस्टोरेंट और स्विगी (Swiggy vs restaurant bill) दोनों के बिल का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, "हे @Swiggy, 2 किलोमीटर दूर के उसी रेस्टोरेंट से वही खाना ऐप पर 81% महंगा क्यों है? क्या यह सुविधा की कीमत है?" उन्होंने बताया कि ऐप पर उन्हें इस खाने के लिए ₹1,473 चुकाने पड़े (Swiggy viral customer complaint), जबकि रेस्टोरेंट में सीधे जाकर वही व्यंजन केवल ₹810 में मिल रहे थे।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई पोस्ट

सुंदर की यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और इसे 21 लाख से ज्यादा बार देखा गया। कई यूजर्स ने स्विगी की मूल्य पारदर्शिता पर सवाल उठाए, तो कुछ लोगों ने डिलीवरी सुविधा को महंगे दामों का कारण बताया।

स्विगी ने दी सफाई, रेस्टोरेंट को जिम्मेदार बताया

स्विगी के एक प्रतिनिधि ने जवाब देते हुए कहा, "हमारी कोशिश रहती है कि प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता रहे, लेकिन ऑनलाइन और ऑफलाइन कीमतें रेस्टोरेंट के निर्णय पर निर्भर करती हैं।" यानि कंपनी ने साफ किया कि खाने की कीमतों का फैसला स्विगी नहीं, बल्कि रेस्टोरेंट खुद तय करते हैं।

बढ़ता प्लेटफॉर्म शुल्क भी बना चिंता का विषय

ग्राहक की यह शिकायत ऐसे वक्त में आई है जब स्विगी और जोमैटो दोनों ने हाल ही में प्लेटफॉर्म फीस बढ़ा दी है। स्विगी का शुल्क अब बढ़ कर ₹15 प्रति ऑर्डर (GST सहित) हो गया है, जबकि जोमैटो ₹12 (GST के बिना) वसूल रहा है।

प्लेटफ़ॉर्म शुल्क क्या होता है ?

प्लेटफ़ॉर्म शुल्क वह अतिरिक्त राशि होती है जो ग्राहक को खाने की कीमत, पैकेजिंग, डिलीवरी शुल्क और टैक्स के अलावा देनी पड़ती है। इस शुल्क का मकसद लॉजिस्टिक्स, ऑपरेशन और क्विक डिलीवरी सेवाओं से होने वाले घाटे की भरपाई करना होता है।

प्लेटफ़ॉर्म फीस से रोजाना करोड़ों की कमाई !

जानकारी के अनुसार स्विगी हर दिन लगभग 20 लाख ऑर्डर प्रोसेस करता है। ऐसे में प्लेटफॉर्म शुल्क के जरिए कंपनी रोजाना करीब ₹3 करोड़ कमा रही है। जोमैटो भी करीब 23–25 लाख ऑर्डर हर दिन डिलीवर कर रहा है और प्लेटफ़ॉर्म फीस से मोटी कमाई कर रहा है।

घाटे में त्वरित सेवाएं, मुनाफे के लिए बढ़े दाम ?

हालांकि दोनों कंपनियां रैवेन्यू के मामले में तेज़ी से बढ़ रही हैं, लेकिन Swiggy का Instamart और Zomato का Blinkit जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म उन्हें भारी खर्च में डाल रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाकर ये कंपनियां लॉन्ग टर्म प्रॉफिट हासिल करना चाहती हैं।

सुविधा की कीमत या छुपा मुनाफा ?

बहरहाल जहां एक ओर ऐप से ऑर्डर करना सुविधाजनक है, वहीं दूसरी तरफ छुपे हुए शुल्क और रेस्टोरेंट द्वारा तय की गई ऊंची कीमतें आम ग्राहकों को परेशान कर रही हैं। अब सवाल यह है कि क्या डिजिटल डिलीवरी वाकई में “सुविधा” है, या फिर ग्राहकों की जेब पर बोझ है?