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Pink Tax: पुरुषों का सामान सस्ता और महिलाओं का महंगा क्यों… कब खत्म होगा यह पिंक टैक्स? हर साल लग रहा लाखों का चूना

What is Pink Tax: यह एक अदृश्य टैक्स है, जो दिखता नहीं है, लेकिन वस्तुओं और सेवाओं की लागत में वसूल लिया जाता है। एक ही कंपनी महिलाओं का सामान महंगा और पुरुषों का सस्ता बेचती है।

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भारत

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Pawan Jayaswal

Jan 20, 2026

What is Pink Tax

महिलाओं से कई वस्तुओं में पिंक टैक्स वसूला जाता है। (PC: AI)

Pink Tax: आप किसी दुकान पर जाकर पुरुषों वाला रेजर खरीदते हैं, तो 40 रुपये का आ जाता है। वहीं, महिलाओं वाला रेजर खरीदते हैं तो 100 रुपये देने पड़ते हैं। महिलाओं के लिए लिप बाम 250 रुपये में आती है, जबकि पुरुषों वाली लिप बाम 160 रुपये में ही आ जाती है। सैलून में हेयर कट लेना हो, तो महिलाओं से पुरुषों की तुलना में काफी ज्यादा पैसा लिया जाता है। एक ही कंपनी पुरुषों का सामान कम कीमत में और महिलाओं का अधिक कीमत में क्यों बेचती है? इसे ही पिंक टैक्स कहते हैं। इसमें कंपनियां महिलाओं के लिए बनाए गए प्रोडक्ट्स या सर्विसेज पर ज्यादा पैसा वसूलती हैं।

महिलाओं को चुकानी पड़ती है ज्यादा कीमत

पिंक टैक्स एक अदृश्य टैक्स होता है। यह सरकार द्वारा नहीं लगाया जाता। ना ही इस पर सरकार की कोई गाइडलाइन या रेगुलेशंस हैं। पिंक टैक्स सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में है। न्यूयॉर्क स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ कंज़्यूमर अफेयर्स की एक स्टडी में पाया गया कि महिलाओं के लिए मार्केट किए गए प्रोडक्ट्स की कीमतें पुरुषों से औसतन 7% ज्यादा थीं। वहीं, महिलाओं के पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स में यह अंतर 13% तक पाया गया। इसी तरह ब्रिटेन में की गई जांच में सामने आया कि महिलाओं का डिओडोरेंट पुरुषों की तुलना में 8.9% महंगा था, जबकि महिलाओं का फेस मॉइस्चराइजर 34.28% ज्यादा कीमत पर बिक रहा था।

महिलाओं पर भारी पड़ रहा पिंक टैक्स

पिंक टैक्स दुनियाभर में महिलाओं पर बड़ा आर्थिक बोझ डाल रहा है। भारत में यह दबाव और साफ दिखता है, जहां महिलाओं को एक ओर ज्यादा खर्च करना पड़ता है और दूसरी ओर जेंडर पे गैप की वजह से उन्हें कम वेतन मिलता है। ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2022 के अनुसार, भारत में पुरुषों और महिलाओं के बीच औसतन 19% वेतन अंतर है, वह भी समान काम के बावजूद। ज्यादा खर्च और कम कमाई का यह मेल महिलाओं की आर्थिक स्थिति को और कमजोर करता है और उनकी क्रय शक्ति घटा देता है।

पिंक टैक्स का इतिहास

पिंक टैक्स का इतिहास कई साल पुराना है, लेकिन इस शब्द का इस्तेमाल पहली बार 1994 में कैलिफोर्निया में हुआ। यह तब सामने आया जब यह महसूस किया गया कि कई शहरों में ब्रांड लगातार महिलाओं से पुरुषों की तुलना में ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं। इसी के साथ एक लंबे समय से देखी जा रही समस्या- जेंडर के आधार पर कीमतों में भेदभाव को औपचारिक पहचान मिली।

फैशन इंडस्ट्री में पिंक टैक्स

बिजनेस ऑफ फैशन की एक स्टडी के मुताबिक, 17 ऐसे मामले सामने आए जहां एक जैसे स्टाइल के कपड़ों की कीमत पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग थी। ये उदाहरण बड़े-बड़े ब्रांड्स के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर देखे गए। ज्यादातर मामलों में महिलाओं के कपड़े ज्यादा महंगे थे और कई बार तो महिलाओं को काफी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी।

सिर्फ पैसों तक नहीं है सीमित

पिंक टैक्स सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है। फैशन के नाम पर कंपनियां महिलाओं के कपड़ों में पॉकेट नहीं देती हैं। ऐसे में उन्हें हैंडबैग या पर्स कैरी करना ही पड़ता है। पुरुषों की जीन्स में आने वाली पॉकेट में आसानी से मोबाइल रख सकते हैं। लेकिन महिलाओं की जीन्स में पॉकेट इतनी छोटी होती है, कि फोन आ ही नहीं पाता। इसके पीछे एक वजह यह भी है कि हैंडबैग की डिमांड बनी रहे।

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