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गाड़ी चलाने वालों को नहीं पता ये बेसिक ट्रैफिक रूल्स, सर्वे में हुआ खुलासा

40 फीसदी लोगों का कहना था कि वे नेत्रहीन लोगों को रास्ता देने या सड़क पार करने में मदद करने के लिए गाड़ी नहीं रोकते हैं,

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गाड़ी चलाने वालों को नहीं पता ये बेसिक ट्रैफिक रूल्स, सर्वे में हुआ खुलासा

नई दिल्ली: हाल ही में एक कार कंपनी ने दस शहरों में सर्वे कराया। सर्वे में पाया गया कि 51 फीसदी लोगों को नहीं पता कि ड्राइविंग के दौरान सुरक्षा के लिए सीटबेल्ट लगाना बेहद जरूरी होता है। वहीं 42 फीसदी लोगों को कार में आने वाले चाइल्ड लॉक के बारे में जानकारी ही नहीं है। यहां एक और बात सामने आई कि रूल्स के हिसाब से गाड़ी चलाने में भारतीय महिलाएं, पुरुषों के मुकाबले अधिक 'सभ्य' होती है।

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दिल्ली जैसे बड़े शहर में रहने वाले 32 फीसदी गाड़ी चलाने वाले लोगों को जानकारी ही नहीं है कि सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य है। वहीं मुंबई के 47 फीसदी प्रतिभागियों ने माना कि पुलिस वाले को चालान करने से रोकने के लिए वे ट्रैफिक पुलिसकर्मी को धमकाते हैं। सर्वे के मुताबिक 51 फीसदी प्रतिभागी नहीं जानते कि एयरबैग्स बेहतर तरीके से तभी काम करते हैं जब यात्रियों ने सीट बेल्ट लगा रखी हो।

फोर्ड मोटर्स इंडिया के सड़क, सुरक्षा एवं जागरुकता को लेकर देश के 10 शहरों दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, लखनऊ, लुधियाना, पुणे और इंदौर में हुए सर्वे में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। सर्वे के मुताबिक 22 फीसदी वाहनचालकों ने माना कि वे ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं, बेंगलुरु में यह संख्या सबसे ज्यादा 56 प्रतिशत रही।

इस सर्वे में पाया गया कि ट्रैफिक नियमों के पालन को लेकर कानून दिल्ली, चेन्नई को सबसे कम स्कोर मिला है, जबकि लुधियाना को सबसे ज्यादा स्कोर मिला है। इस सर्वे में एक और बात सामने आई कि बड़े शहरों की अपेक्षा छोटे शहरों के लोग रूल्स मानने में आगे होते हैं।

सर्वे में जो बात सबसे चौंकाने वाली सामने आई वो ये कि हमारे देश के लोग सड़क पर चलते हुए किसी की मदद को रुकने को तैयार नहीं होते। इस सर्वे में 48 फीसदी प्रतिभागियों ने माना कि वे सड़क पर किसी के लिए रुकना पसंद नहीं करते। यहां तक कि अस्पताल के पास हॉर्न बजाने, घायलों को अस्पताल पहुंचाने और इमरजेंसी व्हीकल्स जैसे एंबुलेंस को रास्ता नहीं देने जैसी हरकतें करने से नहीं चूकते हैं। 40 फीसदी लोगों का कहना था कि वे नेत्रहीन लोगों को रास्ता देने या सड़क पार करने में मदद करने के लिए गाड़ी नहीं रोकते हैं, जबकि 41 फीसदी का कहना था कि वे हादसे के शिकार घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद नहीं करेंगे।

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