
नई दिल्ली: दिवाली के बाद से दिल्ली ncr में एक ही मुद्दा छाया हुआ है। एयरपॉल्यूशन। हर कोई जहरीली हवा के डर से मास्क पहने दिखाई पड़ रहा है। इस एयरपॉल्यूशन के कारण मार्केट में अचानक से एयरप्यूरीफायर की डिमांड बढ़ गई है, लेकिन घर की हवा एयर प्यूरीफायर से ठीक की जा सकती है लेकिन कार चलाने वाला इंसान क्या करे। अगर आप भी कार के लिए एय़र प्यूरीफायर ढूंढ रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल स्टैनफोर्ड यूनीवर्सिटी, AIIMS, IIT के रिसर्चर्स ने मिलकर एक ऐसा एयर प्यूरीफायर बनाया है जो मात्र 2 मिनट में कार की हवा को साफ कर देगा।
इस एयर सैनिटाइजर का नाम ‘एयरलेन्स’ है। यह प्रॉडक्ट एक्टिव मॉलिक्यूलर टेक्नोलॉजी पर बेस्ड है। WHO मानक के अनुसार 2 मिनट में कार के अंदर की हवा को क्लीन कर देता है। पर्सपियन इनोवेशन नाम कू कंपनी ने इसका निर्मऩ किया है और ये रिसर्चर्स ही इस कंपनी को चलाते हैं।
इस तरह करता है काम- ट्रेडिशनल फिल्टर के विपरीत एयरलेन्स एयरफ्लो को अवरुद्ध नहीं करता और हवा को मूल रूप से प्रवाहित होने देता है। एयरलेन्स पराग के कण, रोगाणु, जीवाणु, पीएम 2.5 आदि से भी बचाता है।
सबसे अधिक प्रदूषित होती है कार की हवा- रिसर्चर्स की मानें तो कार के अंदर बैठने वालों को ये गलत फहमी होती है कि उसकी हवा ठीक है लेकिन सच डराने वाला है। कार के अंदर की हवा बाहर की तुलना में कई गुना ज्यादा खराब होती है। दरअसल कार के एसी सिस्टम के अंदर ऐसी कोई तकनीक नहीं है जो पीएम 2.5, पीएम 10 और हवा के अन्य प्रदूषकों को फिल्टर कर सके।
आसानी से कार में हो जाएगा फिट- एयरलेन्स को खास तौर पर भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से बनाया गया है। यह कार एसी वेंटिलेशन सिस्टम से जुड़ा होता है और कार के डैशबोर्ड या बोनट के अंदर कहीं भी छिपाया जा सकता है। इसे किसी अन्य डिवाइस पर स्विच करने का झंझट नहीं है।
कीमत- एयरलेन्स की कीमत 999 रुपये मात्र है और ये मार्केट में कई तरह के मॉडल्स में मिल रहा है। ऑफलाइन के साथ ऐप इसे पॉपुलर ऑनलाइन कमर्स साइट्स से भी ऑर्डर कर सकते हैं।
हर 23 सेकंड में एयर पॉल्यूशन के कारण होती है एक मौत- WHO के अध्ययन के मुताबिक, भारत में हर 23 सेकंड पर एयर पॉल्यूशन के कारण 1 इंसान की मौत हो रही है। दरअसल हम हर दिन 12000 लीटर हवा का इस्तेमाल सांस लेने के लिए करते हैं। लेकिन जब ये हवा ही साफ न हो तो ऐसे में शरीर को मुकसान पहुंचता है। एयर पॉल्यूशन बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा प्रभाव डालता है। इससे दिल की बीमारी, फेफड़े का कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसऑर्डर, स्ट्रोक, मितली, सिरदर्द आदि हो सकता है
Updated on:
07 Nov 2019 01:48 pm
Published on:
07 Nov 2019 01:47 pm
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