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संजीव शर्मा, चंडीगढ़। आरक्षण की मांग को लेकर हरियाणा के जाट एक बार फिर से सडक़ों पर हैं। जाटों ने पिछले करीब दो दिन से रेलवे ट्रेक पर कब्जा कर रखा है। प्रदेश इससे पहले भी जाट आरक्षण आंदोलन झेल चुका है। जिसमें करीब 500 करोड़ रुपए की संपत्ति नष्ट हो गई थी। इस बार भी सरकार को अंदेशा है कि आरक्षण का आंदोलन लंबा चल सकता है। इस आंदोलन से दो दिन के भीतर सैकड़ों रेलगाडिय़ां प्रभावित हो गई हैं।
हिसार जिले में रेलगाडिय़ां रोकी
आरक्षण की यह लड़ाई जाटों के एक खेमे ने शुरू की है। इससे पहले पूर्व हुड्डा सरकार के कार्यकाल में भी आरक्षण की लड़ाई चली थी। प्रदेश में जाट आरक्षण की लड़ाई सबसे पहले 24 नवंबर 2006 को शुरू हुई थी। 13 दिसंबर 2010 को जाट आरक्षण समीति ने हिसार जिले में रेलगाडिय़ां रोकी थी। इसके बाद वर्ष 2011 और 2013 में भी जाट आरक्षण आंदोलन हो चुके हैं। आरक्षण के आंदोलनों में हर बार हरियाणा को कटु अनुभव हुआ है।
500 करोड़ रुपए की संपत्ति बर्बाद
एक रिपोर्ट के अनुसार पूर्व समय के दौरान हुए जाट आरक्षण आंदोलन में हरियाणा व देश की करीब 500 करोड़ रुपए की संपत्ति बर्बाद हुई थी। जिसमें केवल 214 करोड़ रुपए रेलवे का नुकसान हुआ था। इसके अलावा आंदोलनकारियों ने आरक्षण की मांग के दौरान हिसार जिले में एक कॉटन मिल, गोपाल घी की फैक्टरी तथा एसबीआई की इमारत को आग के हवाले कर दिया था। जिनकी कीमत क्रमश 19.60 करोड़, 2.20 करोड़ तथा 11.50 करोड़ रुपए आंकी गई थी। इसके अलावा आंदोलनकारियों ने पूर्व समय के दौरान एक न्यायाधीश की कार आग के हवाले कर दी थी। सूत्रों के अनुसार पूर्व समय के दौरान हुए जाट आरक्षण आंदोलनों में केवल हिसार जिले में 160 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ था।
अंतरराष्ट्रीय इनवैस्टर मीट
एक बार फिर से हरियाणा सरकार के समक्ष यह आंदोलन बड़ी चुनौती बनकर सामने आ गया है। हरियाणा सरकार का पूरा ध्यान इस समय अंतरराष्ट्रीय इनवैस्टर मीट की तरफ है। जिसमें कई देशों के प्रतिनिध शामिल हो रहे हैं। उधर हरियाणा विधानसभा तथा लोकसभा का बजट सत्र भी शुरू होने जा रहा है। इस आंदोलन को लेकर प्रदेश सरकार पूरी तरह से सतर्क हो गई है। बीते 24 घंटे के दौरान आरक्षण को लेकर हुई गतिविधियों पर जहां पुलिस महानिदेशक खुद नजर रख रहे हैं, वहीं प्रदेश के गृह सचिव तथा मुख्यमंत्री खुद प्रकरण की जानकारी ले रहे हैं।
आंदोलनकारियों के साथ बातचीत
प्रदेश सरकार इस मुद्दे को ज्यादा लंबा नहीं खींचना चाहती है। जिसके चलते सरकार आंदोलनकारियों के साथ बातचीत के माध्यम से बीच का रास्ता निकालना चाहती है। सरकार का प्रयास रहेगा कि इनवैस्टर मीट से पहले-पहले इस आंदोलन को शांत कर लिया जाए।
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