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ये कहानी है Union Territory Chandigarh के भ्रष्ट पति-पत्नी की, जरूर पढ़िए

-पति केन्द्र शासित प्रदेश में सहायक अभियंता और पत्नी थी क्लर्क -13 साल में 56 लाख की सैलरी से 1.36 करोड़ की संपत्ति बनाई -कोर्ट ने तीन साल के लिए जेल भेजा, 85 लाख रुपये का जुर्माना ठोका

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Corruption

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चंडीगढ़। ये कहानी है पति और पत्नी की। प्यार में दीवाने या किसी ‘वो’ के सताये हुए पति-पत्नी की नहीं। ये कहानी है चंडीगढ़ के भ्रष्ट पति-पत्नी की। दोनों सरकारी मुलाजिम। इस दौरान जमकर भ्रष्टाचार किया। आय से कई गुना धन जमा कर लिया। लेकिन वो कहते हैं न कि पाप का घड़ा एक दिन जरूर फूटता है। वैसा ही हुआ। दोनों केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हत्थे चढ़ गए। दोनों जेल में हैं। 85 लाख रुपये का जुर्माना हुआ है सो अलग। बदनामी तो होती ही है। कुल मिलाकर किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहे हैं।

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पति इंजीनियर तो पत्नी बाबू

केन्द्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में सहायक अभियंता राजेश और उनकी पत्नी मंजू की कहानी है ये। राजेश ने वर्ष 1987 में यू.टी. इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में सेवा शुरू की थी। उनकी पत्नी 1992 में पंजाब के एक विभाग में क्लर्क थीं। 1987 से 2010 तक इन दोनों की सैलरी मिलाकर करीब 56.26 लाख बनती थी, जबकि इनके पास कुल 1 करोड़ 36 लाख 54, 600 रुपए की संपत्ति मिली थी।

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2009 में किया था गिरफ्तार

वर्ष 2009 में सी.बी.आई. ने राजेश को 70 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। राजेश की गिरफ्तारी के बाद सी.बी.आई. जांच के तहत पता चला था कि उसके पास करोड़ों की संपत्ति है। इसके बाद सी.बी.आई. ने आय से अधिक संपत्ति का भी केस दर्ज किया। 70 हजार रुपए की रिश्वत केस में राजेश को वर्ष 2012 में अढ़ाई साल की सजा सुनाई जा चुकी है।

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निवेश के दस्तावेज मिले

सी.बी.आई. के कील कंवर पाल सिंह ने अदालत में दलील देते हुए कहा कि राजेश और उसकी पत्नी ने 13 साल में 56 लाख रुपए की सैलरी ली, लेकिन इनके पास से अलग-अलग स्रोतों से 1 करोड़ 36 लाख रुपए से भी ज्यादा की संपत्ति मिली। ये संपत्ति इनके पास किसान विकास पत्र, बैंक सेविंग, एफ.डी., पोस्ट ऑफिस सेविंग और प्लॉट के रूप में थी।

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दोनों को तीन-तीन साल की सजा

आय से अधिक संपति के मामले में सी.बी.आई. की विशेष अदालत ने दोषी यूटी (केन्द्र शासित प्रदेश चंडीगढ़) के पूर्व असिस्टेंट इंजीनियर राजेश और उसकी पत्नी मंजू को 3-3 साल की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने दंपति पर 85 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया है। दोनों के खिलाफ सी.बी.आई. ने वर्ष 2010 में केस दर्ज किया था। अदालत ने आदेश में कहा कि सरकारी अधिकारी अपने निजी फायदे के लिए अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। एक भ्रष्ट अधिकारी पूरे विभाग को बदनाम कर देता है। समाज में बढ़ रहे भ्रष्टाचार को कम करने के लिए ऐसे अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।

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