
Drug
चंडीगढ़। हरियाणा
में पूर्व समय के दौरान उत्तर प्रदेश की एक कंपनी द्वारा मच्छर मार दवा की जगह पानी
सप्लाई कर दिया गया। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत 21 लाख रूपए से अधिक
धनराशि से खरीदी गई दवा में घोटाला सामने आने के बाद सरकार ने मामले में कार्रवाई
के आदेश जारी कर दिए हैं।
हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया
कि गत कांग्रेस सरकार द्वारा खरीदी गई मच्छर मारने की दवाई "पारेथ्रम" नकली पाये
जाने पर "पैरामाऊंट पैस्टिसाईड लिमिटिड, मेरठ" उत्तरप्रदेश नामक कम्पनी को ब्लैक
लिस्ट करने व आपराधिक मामला दर्ज करने के आदेश दिये है। एक लोट में मंगवाई गई इस
दवाई से सरकार को करीब 22 लाख रूपये का नुकसान हुआ है।
विज ने कहा कि पूर्व
मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा शासन के दौरान 8 अगस्त 2012 से 7 अगस्त 2014 के
मध्य इसके लिए रेट तय किया गया था, जिसके तहत 11 जून 2014 को 36,500 रूपये प्रति 25
लिटर के हिसाब से 21.90 लाख रूपये में यह दवाई खरीदी गई थी। इस अवधि के मध्य दवाई
के कुछ लोट और भी हो सकते है, जिसकी पड़ताल करवाई जा रही है।
स्वास्थ्य
मंत्री ने कहा कि दवाइयों के सैम्पल को रूटीन चैकअप के लिए जगत प्रसिद्घ श्रीराम
औद्योगिक अनुसंधान संस्थान प्रयोगशाला में भेजा गया था, जिसने 24 फरवरी 2015 को
सैम्पल को फेल करार दिया। यह भी सामने आया कि पारेथ्रम दवाई की बोतलों में दवाई के
स्थान पर हल्के पीले रंग का पानी जैसा पदार्थ भरा हुआ है, जोकि दवाई के रंग से मेल
खाता हुआ है। रिपोर्ट में यह तय हो गया कि दवाई की बोतलों में कोई दवाई तो थी ही
नही बल्कि उसमें मात्र पानी भरा पाया गया।
विज ने इस मामलें गम्भीरता को
देखते हुए कम्पनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा कम्पनी को ब्लैक लिस्ट करने का
आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि इस लोट से सरकार को करीब 22 लाख रूपए का नुकसान हुआ
है, परन्तु सरकार ने इस कम्पनी से गत वर्षो के दौरान दवाई के कितने लोट मंगवाये गये
है, इसका भी पता लगाया जा रहा है। इस लोट के तहत अम्बाला में 2,55,500 रूपए, भिवानी
में 1,46,000 रूपए, गुडगांव में 3,65,000 रूपए, हिसार में 4,0,1500 रूपए, कैथल में
1,0,9500 रूपए, करनाल में 4,38,000 रूपए तथा 4,74,500 रूपए की कुल 1500 यूनिट दवाई
मंगवाई गई थी।

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