
साध्वी प्रेम बाईसा। फाइल फोटो- पत्रिका नेटवर्क
Sadhvi Prem Baisa Death जोधपुर। बोरानाडा थानान्तर्गत पाल गांव स्थित एक आश्रम में तबीयत बिगड़ने के बाद साध्वी प्रेम बाईसा की बुधवार शाम संदिग्ध हालात में मौत हो गई। उन्हें पाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल लाया गया, लेकिन तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
पुलिस ने आश्रम को सील कर शव महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। उधर, मृत्यु के काफी देर बाद सोशल मीडिया पर साध्वी के नाम की आईडी से एक पोस्ट अपलोड की गई, जिसमें लिखा गया कि जीते जी नहीं तो जाने के बाद तो न्याय मिलेगा। इस पोस्ट की अधिकृत पुष्टि नहीं हो सकी है।
साध्वी के निजी सचिव राजूराम कूकना ने बताया कि बुधवार सुबह सांस लेने में तकलीफ होने पर चिकित्सक को पाल गांव के आरती नगर स्थित आश्रम बुलाया गया था। इंजेक्शन लगाने के बाद उन्हें कुछ देर राहत मिली, लेकिन करीब एक घंटे बाद फिर तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पाल रोड क्षेत्र के निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां शाम करीब पांच बजे उनका निधन हो गया। साध्वी प्रेम बाईसा ने सांसारिक पिता महंत बिरमनाथ महाराज को गुरु बनाकर अध्यात्म के क्षेत्र में प्रवेश किया था। वे मूलत: बाड़मेर जिले के परेऊ गांव की रहने वाली थीं। उनकी माता की समाधि आगोलाई क्षेत्र के सास्ती में स्थित है।
गौरतलब है कि पिछले साल सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद साध्वी प्रेम बाईसा काफी आहत हो गई थीं। सहायक पुलिस आयुक्त (पश्चिम) छवि शर्मा ने बताया कि रात में शव को मोर्चरी में रखवाया गया है। आश्रम को सील कर सुरक्षित किया गया है। सालवा कला में गोशाला संस्थापक अध्यक्ष और कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा मंगलवार को अजमेर के बड़ा लांबा में नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा पूर्ण कर पाल आरती नगर स्थित आश्रम लौटी थीं।
मौत के करीब चार घंटे बाद सोशल मीडिया पर साध्वी प्रेम बाईसा नाम की आईडी से एक पोस्ट अपलोड की गई। इसमें लिखा गया कि उन्होंने हर क्षण सनातन प्रचार के लिए जीवन जिया। दुनिया में सनातन धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है। देश के कई संतों को पत्र लिखकर अग्नि परीक्षा के लिए निवेदन किया था। संत-महात्माओं पर पूर्ण भरोसा है। मेरे जीते जी नहीं तो जाने के बाद तो न्याय मिलेगा। मृत्यु के बाद सामने आई इस पोस्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पोस्ट किसने अपलोड की? क्या साध्वी की सोशल मीडिया आईडी का एक्सेस किसी अन्य व्यक्ति के पास था?
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साध्वी प्रेम बाईसा का शव देर रात एम्बुलेंस से पाल गांव स्थित आश्रम ले जाया गया। एसीपी छवि शर्मा भी आश्रम पहुंचीं और शव का पोस्टमार्टम करवाने के लिए मोर्चरी में रखवाने का आग्रह किया। साध्वी की मृत्यु की सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम पहुंचे और निष्पक्ष जांच की मांग की। इस दौरान श्रद्धालुओं ने नारेबाजी भी की। एहतियात के तौर पर मौके पर पुलिस जाप्ता तैनात किया गया।
Published on:
29 Jan 2026 03:45 pm

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