- दो जिलों की जमीन आवंटित- राज्य का १७वां जैव अभयारण्य
चेन्नई. तमिलनाडु सरकार ने कावेरी दक्षिण वन्यजीव अभयारण्य के रूप में मंगलवार को ६८ हजार ६४० हेक्टेयर जमीन आरक्षित करने की अधिसूचना जारी की है। यह जमीन धर्मपुरी और कृष्णगिरि जिलों की है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने ट्वीट करते हुए घोषणा की कि १७वें अभयारण्य स्थापना की घोषणा की वजह राज्य में जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित करना है।
सीएम ने अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखा, 'मुझे इस बात की घोषणा करने में प्रसन्नता हो रही है कि तमिलनाडु सरकार ने 'कावेरी दक्षिण वन्यजीव अभयारण्यÓ को राज्य के १७वें वन्यजीव अभयारण्य के रूप में अधिसूचित कर दिया है। यह महत्वपूर्ण कदम तमिलनाडु हरित जलवायु कंपनी के मिशन के साथ राज्य में जैव विविधता के संरक्षण में आगे तक जाएगा।Ó
विधानसभा में हुई थी घोषणा
डीएमके सरकार ने २५ अप्रेल को विधानसभा में घोषणा की थी कि होसूर डिविजन के अंचेती, उरिगम व ज्वालागिरि के पर्वतीय क्षेत्रों की ४७८ वर्ग किमी के इलाके को कावेरी दक्षिण जैव अभयारण्य के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। उस घोषणा के बाद यह अधिसूचना जारी हुई है जिसके तहत धर्मपुरी और कृष्णगिरि जिलों जहां हाथियों की उपस्थिति अधिक है, की ६८६४० हेक्टेयर जमीन को संरक्षित कर दिया गया है। यह रीजन नदी जलीय जीव-जंतुओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
कावेरी नदी की तराई वाला इलाका
वन विभाग के अनुसार यह संरक्षित क्षेत्र कावेरी नदी के बहाव के ५० किमी तक की दूरी का संरक्षित क्षेत्र है। इस इलाके का प्रमुख आरक्षण नीलगिरि जीवमंडल (बायोस्फीयर) रिजर्व की रमणीयता भी है। गौरतलब है कि सरकार ने इससे पहले तिरुपुर जिले के नंजरायण जलीय क्षेत्र को १७वां पक्षी अभयारण्य घोषित कर १२ अक्टूबर को शासनादेश जारी किया था। इसी तरह करूर और दिंडीगुल जिले में १२ हजार हेक्टेयर क्षेत्र स्लेंडर लोरिस (नरवानर गण) प्रजाति के लिए रिजर्व किया गया था।