
चेन्नई.
जेम अस्पताल ने चिकित्सा जगत में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। गत दो वर्षों में यहां नौ एबीओ-इनकम्पैटिबल किडनी प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक सम्पन्न किए गए हैं। यह उपलब्धि अस्पताल को उन चुनिंदा केन्द्रों की श्रेणी में ला खड़ा करती है जो इस अत्यंत जोखिमपूर्ण प्रक्रिया को सुरक्षित ढंग से सम्पन्न करने में सक्षम हैं। एबीओ-इनकम्पैटिबल प्रत्यारोपण सामान्यतः अत्यंत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें दाता और प्राप्तकर्ता के रक्त समूह में असमानता होती है। इसके लिए विशेष प्रकार की डिसेंसिटाइजेशन, उन्नत इम्यूनोसप्रेशन व संक्रमण नियंत्रण की आवश्यकता होती है। जेम अस्पताल ने इन सभी चुनौतियों के बावजूद शत-प्रतिशत सफलता प्राप्त की और किसी भी रोगी में गंभीर संक्रमण की घटना नहीं हुई।
अस्पताल के निदेशक एवं शल्य-गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पी. सेंथिलनाथन ने कहा कि ऐसे प्रत्यारोपण से रोगियों को लंबे समय तक संगत दाता की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती और मृत्यु दर में कमी आती है। वहीं नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. के. बालामुकुन्दन ने बताया कि प्लाज्माफेरेसिस द्वारा रोगी के एंटी-बॉडी स्तर को नियंत्रित कर प्रत्यारोपण संभव बनाया गया तिरुवन्नामलै, टिंडिवनम, मेलमालयनूर, चेन्नई और पट्टुक्कोट्टै से आए रोगियों ने यहां नई आशा पाई।
Updated on:
29 Jan 2026, 9:42 PM IST
Published on:
29 Jan 2026, 9:42 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.