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अभिनेत्री त्रिशा ने शुरू किया हस्ताक्षर अभियान

अभिनेत्री त्रिशा कृष्णा ने मंगलवार को बालश्रम को जड़ से खत्म करने के प्रयासों का समर्थन किया। अंतरराष्ट्रीय बालश्रम उन्मूलन दिवस...

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Actress Trisha launches signature campaign

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चेन्नई।अभिनेत्री त्रिशा कृष्णा ने मंगलवार को बालश्रम को जड़ से खत्म करने के प्रयासों का समर्थन किया। अंतरराष्ट्रीय बालश्रम उन्मूलन दिवस पर यूनिसेफ के समन्वय में तमिलनाडु मजदूर और कर्मचारी विभाग द्वारा आयोजित हस्ताक्षर अभियान और स्टूडेंट रैली की शुरुआत करते हुए त्रिशा ने कहा कि थोड़े पैसे कमाने के लालच में बच्चों का भविष्य खराब किया जाता है।

यूनिसेफ के अनुसार बहुत से बच्चों का कार्यस्थल पर उत्पीडऩ होता है। ऐसे हालात में अपने बच्चों से बालश्रम कराना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि बालश्रम बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और संज्ञानात्मक विकास को प्रभावित करता है। हम सभी को एक साथ मिलकर बालश्रम को जड़ से खत्म करने का प्रयास करना चाहिए।

हितकारी मार्ग वही जो मन को अच्छा बनाए
पोरुर जैन स्थानक में विराजित कपिल मुनि ने कहा बाहरी दरिद्रता जैसे दुखदायी है वैसे ही आतंरिक विपन्नता दुर्गति का कारण बनती है। जीवन में विवेक और संवेदनशीलता की कमी आंतरिक दरिद्रता का ***** है।
सत्ता और संपत्ति के बल पर व्यक्ति उच्च स्थान पाने में सफल तो हो जाता है लेकिन उच्च स्थान पर सुशोभित होने के लिए विवेक अत्यावश्यक है।

विवेक से संपन्न बनने के लिए बेहद जरूरी है कि इंसान अपने जीवन में सुख के बजाय हित को अहमियत दे। अधिकांश लोग उसे पसंद करते हैं जो सुखकर होता है।

सुखकर वह होता है जो मन को अच्छा लगता है। और हितकर मार्ग वह होता है जो मन को अच्छा बनाता है। ये जरूरी नहीं है कि जो सुखकर हो वह हितकर भी हो। मिली हुई स्वाधीनता का दुरुपयोग नहीं करना ही धर्म है। व्यक्ति जिस चीज का दुरुपयोग करता है भविष्य में उसकी प्राप्ति से वंचित होने का अभिशाप झेलने के लिए मजबूर हो जाता है। विवेक का तकाजा यही है कि व्यक्ति अपने श्रम, समय, सामथ्र्य और संपत्ति का परमार्थ के मार्ग में विनियोग करके जीवन को सार्थक मूल्य प्रदान करे।

इस मौके पर महेन्द्र कुमार बैद, पदमचंद कांकरिया, जुगराज बोरुंदिया, जबरचंद बम्ब आदि समेत अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। मुनि बुधवार सवेरे यहां से प्रस्थान कर विरुगमबाक्कम पहुंचेंगे जहां नवनिर्मित मीठालाल-आदित्यकरण पगारिया भवन में प्रवास के दौरान प्रतिदिन सवेरे 9.15 बजे से प्रवचन, दोपहर 3 बजे से 4 बजे तक ज्ञानार्जन, रात्रि 8.30 बजे से 9.30 बजे तक युवा प्रकोष्ठ के लिए जिज्ञासा-समाधान आदि विविध धार्मिक कार्यक्रम होंगे।