
anna university
चेन्नई. राज्य सरकार ने केन्द्र को सूचित किया कि प्रदेश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिग संस्थान अन्ना विश्वविद्यालय को इन्स्टीट्यूट ऑफ एमिनेन्स (आईओई) की जरूरत नहीं है। विश्वविद्यालय के कुलपति एम.के.सुरप्पा के अन्ना विश्वविद्यालय के वित्तीय प्रस्ताव को रिजेक्ट कर दिया। तमिलनाडु ने 2017 में केन्द्र को स्टेटस को लेकर सबमिट किए प्रस्ताव को भी वापस ले लिया।
विश्वविद्यालय के आईओई स्टेटस मामले के अध्ययन को लेकर एक पांच सदस्यीय मंत्रालयिक कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने स्टेटस के खिलाफ प्रस्ताव लिया। सुरप्पा ने कहा था कि विश्वविद्यालय खुद के स्त्रोतों से आय हासिल कर लेगा। इसका प्रस्ताव उन्होंने केन्द्र को भेज दिया था। इस पर राज्य सरकार ने मंत्रालयिक कमेटी की रिपोर्ट को केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष रखा।
तमिलनाडु सरकार ने कहा कि सुरप्पा का दिया गया प्रस्ताव वित्तीय जरुरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है। संस्थान के पास अपने खुद के संसाधन नहीं है। उच्च शिक्षा मंत्री के.पी.अन्बलगन ने कहा कि यह नहीं भूले कि केन्द्र ने इस संस्थान के प्रसिद्ध होने के कारण आईओई स्टेटस देने लिए प्रस्ताव दिया है। हम कोशिश करेंगे कि राज्य फंड को प्राप्त कर सकें। सुरप्पा ने केन्द्र को राज्य सरकार की ओर से भेजे किसी प्रस्ताव के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की। सुरप्पा ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
हर साल 314 करोड़ की आय
सुरप्पा ने 2 जून को केन्द्र को लिखा था कि विश्वविद्यालय खुद के स्त्रोत से हर साल 314 करोड़ की राशि जनरेट कर सकता है। यानी पांच साल में 1570 करोड़ की राशि प्राप्त कर सकता है। सुरप्पा ने कहा था कि अतिरिक्त राशि की जरूरत नहीं है। ऐसे में आईओई स्टेटस रखा जाना चाहिए।
पेश किया था घाटे का बजट
राज्य सरकार ने केन्द्र को बताया कि विश्वविद्यालय के पिछले साल भी घाटे का बजट पेश किया था। सुरप्पा ने जो आंतरिक स्त्रोत से राशि हासिल करने की बात कही है वह संबंध कॉलेजों एवं परीक्षा शुल्क से मिलने वाली आय है। यह आईओई स्टेटस के लिए डाइवर्ट नहीं की जा सकती है।
................................
Published on:
03 Nov 2020 08:16 pm
बड़ी खबरें
View Allचेन्नई
तमिलनाडु
ट्रेंडिंग
