
समूचे दक्षिण समेत विदेशों में भी भगवान अय्प्पन के लाखों भक्त हैं जिनकी सदियों से उनमें अटूट आस्था हैं। सुप्रीम कोर्ट के हर उम्र की महिला को अयप्पन मंदिर में दर्शन की अनुमति देने से उपजे विवाद के राजनीतिक मायने भी हैं। केरल की वाम सरकार के प्रति अयप्पा भक्तों में आक्रोश है तो कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति ने भाजपा को इन भक्तों के माध्यम से दक्षिण भारत में अपनी जमीन पक्की करने का एक बड़ा मौका दे दिया है। भाजपा का झंडा ताने आस्था और संस्कृति की पैरोकारी करने से अयप्पा भक्तों के मानस में भगवा पार्टी के प्रति नई सोच कायम हुई है।
इस संघर्ष में जनता के साथ भाजपा अपने झंडे व कार्यकर्ताओं के साथ सडक़ पर उतर गई। चूंकि सबरीमाला मुद्दे को बहुसंख्यक जनता अपनी संस्कृति व परंपराओं पर सीधा प्रहार मान रही है। इसलिए दक्षिणी राज्यों में जनता के बीच भाजपा को लेकर अच्छा माहौल तैयार हुआ। उधर, रही सही कसर कांग्रेस व वामपंथी दलों ने खुद पूरी कर दी। इन दोनों दलों ने सबरीमाला के विरोध प्रदर्शन के पीछे आरएसएस और भाजपा का हाथ बताते हुए मोर्चा खोला था। इससे जनता में स्पष्ट संदेश गया कि उनके साथ केवल भाजपा है।
राजनीतिक विश्लेेषक मान रहे हैं कि दक्षिण के सभी राज्यों में २०१४ में भाजपा को इसका लाभ मिलेगा। आसन्न तेलंगाना विधानसभा चुनाव में इस अनुमान का परीक्षण भी हो जाएगा। गौरतलब है कि २०१४ के लोकसभा चुनाव में भाजपा को तमिलनाडु में ५.५ प्रतिशत, केरल में १०.३३ प्रतिशत, कर्नाटक में ४३ प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में ८.५० प्रतिशत और तेलंगाना में ५.७० प्रतिशत वोट मिले थे। विश्लेेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर भाजपा की लीड से उसे लोकसभा में कर्नाटक, केरल व आंध्रप्रदेश में सीधा लाभ मिल सकता है।
हालांकि भाजपा इस विषय पर सीधा बोलने से बच रही है। केरल भाजपा के महासचिव के. सुरेंद्रन का कहना है कि हमनें राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे पर जनता का साथ नहीं दिया है, बल्कि यह जनता की भावना के साथ खड़ा होने के लिए किया गया। क्योंकि पूरे दक्षिण भारत में अयप्पा स्वामी के करोड़ों भक्त हैं और समाज के सभी वर्गों के लोग सबरीमाला मंदिर की पवित्रता बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे मेें जनता के हित के लिए काम करने वाला कोई राजनीतिक दल भक्तों के साथ सडक़ पर उतरने से स्वयं को कैसे रोक सकता था? अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव सीडी मयप्पन का कहना है कि ऐसे मुदï्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोई सोच भी कैसे सकता है? जहां तक कांग्रेस पार्टी के न्यूट्रल होने की बात है तो कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष पार्टी है और हम सभी वर्गों व समुदायों के साथ खड़े रहते हैं, इसलिए इस मुद्दे पर हम न्यूट्रल हैं।
वाम दल व कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारी व नेता भी इस मुद्दे पर भाजपा को लाभ मिलने को स्वीकार कर रहे है। तमिलनाडु कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि हाईकमान ने इस मुद्दे की गंभीरता समझने में भूल कर दी। इस मुद्दे पर अन्य समुदाय के लोग भी हिंदुओं के साथ खड़े दिखे। कांग्रेस न्यूट्रल रही और पार्टी को इसका नुकसान होगा और भाजपा लोगों के साथ आंदोलन में बढक़र आगे रही तो उसे चुनाव में लाभ भी होगा।
सबरीमाला में स्वामी अयप्पन का दर्शन कर लौट रहे तमिलनाडु के कोयम्बत्तूर के टी. प्रकाश से जब प्रतिक्रिया मांगी तो वे पहले तो केरल की वामपंथी सरकार पर बरस पड़े। जब कांग्रेस व वामदलों द्वारा भाजपा के लोगों द्वारा लोगों को भडक़ाने के आरोप को उठाया तो उनका स्पष्ट कहना था, ‘यह हमारी आस्था, संस्कृति व परंपरा के अस्तित्व की लड़ाई है और इस संघर्ष में भाजपा ही हमारे साथ खड़ी मिली। मैंने अब तक भाजपा को कभी वोट नहीं दिया, पर अगले चुनाव में मेरा वोट भाजपा को ही जाएगा।’
Published on:
23 Oct 2018 02:44 pm
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