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विकास से कोसों दूर चेन्नई सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र

तमिलनाडु के लोकसभा क्षेत्रों में सेंट्रल चेन्नई प्रमुख सीट है। इस सीट का प्रतिनिधित्व पूर्व मानव संसाधन मंत्री स्वर्गीय मुरासोली मारन ने भी किया...

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Chennai Central Lok Sabha Area away from development

Chennai Central Lok Sabha Area away from development

चेन्नई।तमिलनाडु के लोकसभा क्षेत्रों में सेंट्रल चेन्नई प्रमुख सीट है। इस सीट का प्रतिनिधित्व पूर्व मानव संसाधन मंत्री स्वर्गीय मुरासोली मारन ने भी किया था। उनके पुत्र दयानिधि मारन २००९ में सेंट्रल चेन्नई लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संचार मंत्री बन थे। इस संसदीय क्षेत्र से डीएमके नौ बार चुनाव जीता है। वहीं २०१४ के लोकसभा चुनाव में अम्मा लहर में इस सीट पर एआईएडीमके ने कब्जा कर लिया। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में इस संसदीय क्षेत्र के अन्र्तगत आने वाली सभी छह विधान सीटों पर डीएमके ने ही कब्जा किया।

बुनियादी सुविधाओं पर नजर डालने पर यह प्रतीत होता है कि सभी दलों ने इस संसदीय क्षेत्र के निवासियों के साथ छल ही किया है। बता दें कि सेंट्रल चेन्नई से सटा हुआ इलाका ही विकास से महरूम है तो अन्य इलाकों का क्या कहने? वालटैक्स रोड पिछले कई वर्षों से ट्रैफिक जाम का शिकार है। सुबह-शाम पीक आवर्स में इस सडक़ से आवाजाही करना टेढ़ी खीर साबित होता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस मार्ग पर जाम लगने का सबसे बड़ा कारण एलीफेंट गेेट रोड पर चौपहिया वाहनों की आवाजाही बंद होना है। गौरतलब है कि एलीफेंटगेट ब्रिज की जर्जर हालत के चलते पिछले तीन वर्षों से एलीफेंट गेट रोड एफओबी पर चौपहिया वाहनों की आवाजाही पर पाबंदी लगी हुई है तब से जाम लगना शुरू हुआ जो अब तक जारी है।

पुरुषवाक्कम निवासी एस पवन कुमार ने कहा हमारा ऑफिस साहुकारपेट में है। तीन साल पहले वाया एलीफेंट गेट महज पांच मिनट में ऑफिस से घर पहुंच जाता था लेकिन अब बेसिनब्रिज से होकर जाने में ४५ मिनट लगते हैं। उन्होंने कहा एलीफेंटगेट ब्रिज का निर्माण कार्य पिछले तीन साल से अधरझूल में है।

वेपेरी निवासी आनंद सिंह बताते हैं कि इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व यहां की सत्ताधारी पार्टी एआईएडीमके कर रही है। एनडीए सरकार से बेहतर संबंध के बावजूद यहां के सांसद अपने क्षेत्र में कोई खास विकास नहीं कर सके। यही वजह है कि इस बार यह सीट अपनी सहयोगी पार्टी पीएमके के हवाले कर दी है।

चेतपेट निवासी राजेश कुमार यादव कहते हैं कि पिछले पांच सालों में यहां के सांसद ने कुछ काम नहीं किया। बस चेन्नई सेंट्रल का नाम बदलकर एमजीआर किया गया है। इस संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले चेतपेट और पार्क उपनगरीय स्टेशनों पर भी किसी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।

विल्लीवाक्कम निवासी टीसी विनोद का कहना है कि इस संसदीय क्षेत्र के अधिकांश उपनगरीय इलाकों में विकास कार्य के प्रति मौजूदा सरकार असफल साबित हुई है। ईवीआर पेरियार सालै, नेल्सन मणिकम रोड, अण्णानगर राउंटाना सभी इलाकों में लग रहे ट्रैफिक जाम से प्रदूषण का खतरा दिनोंदिन बढ़ रहा है।

वालटेक्स रोड निवासी प्रभात सिंह कहते हैं कि साहुकारपेट, पुरुषवाक्कम, जॉर्जटाउन, पार्कटाउन, चूलै, वेपेरी आदि इलाकों में पेयजल की समस्या है। सरकार आमजनों के लिए जब पेयजल का व्यवस्था नहीं कर पाती तो उसे वोट देने से क्या फायदा है। इस बार तो यहां के मतदाता स्थानीय समस्या पर ही मतदान करेंगे।

गेंगुरेड्डी रोड निवासी अब्दुल करीम कहते हैं कि इस संसदीय क्षेत्र में पिछले तीन सालों से ड्रेनेज का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। सरकार कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को ही ड्रेनेज निर्माण का टेंडर देती है। इसलिए पिछले तीन सालों में काम पूरा नहीं हुआ है।
पूंदमल्ली हाई रोड, कन्नूर हाई रोड सरीखे कई मार्गों पर ड्रेनेज का काम नहीं पूरा होने से फुटपाथ गायब हैं और आमजनों को जान जोखिम में डालकर सडक़ पर आवाजाही करनी पड़ती है।
किलपॉक निवासी दिनेश सैनी के अनुसार इस लोकसभा क्षेत्र का विकास नहीं होने के लिए डीएमके जिम्मेदार है। वह कहते हैं कि इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व सर्वाधिक डीएमके ने ही किया है। यदि उसने यहां बेहतर काम किए होते तो सडक़, पानी, और आवागमन संबंधी समस्याएं नहीं होती।