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कांग्रेस ने चुनाव आयोग में जताई आपत्ति

-२००० की वित्तीय मदद-प्रदेशाध्यक्ष ने दिया पत्र

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चेन्नई. साठ लाख बीपीएल परिवारों को २-२ हजार रुपए की आर्थिक मदद देने की सरकार की घोषणा पर आपत्ति जताई हुए तमिलनाडु कांग्रेस ने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र भेजा है।
तमिलनाडु कांग्रेस के अध्यक्ष के. एस. अलगिरी ने शुक्रवार को जारी वक्तव्य में कहा कि जयललिता के निधन के बाद मुख्यमंत्री पलनीस्वामी की अगुवाई वाली सरकार ने अपने दो साल के शासनकाल की उपलब्धियों पर आडम्बरपूर्ण विज्ञापन प्रकाशित कर वाहवाही लूटने की कोशिश की। जबकि राज्य में नित नई समस्याएं विकराल रूप धारण करती जा रही है। जनता के हितों के खिलाफ मीथेन गैस परियोजना, नीट, हाईड्रो कार्बन योजना, न्यूट्रीनो व कावेरी पर मेकेडाटू परियोजनाएं थोपी जा रही है। इन सभी परियोजनाओं को थोपने के लिए केंद्र की भाजपा सरकार जिम्मेदार है। पचास सांसदों वाली एआईएडीएमके इसका विरोध करने के बजाय सहयोग करती आ रही है। जीएसटी के लागू होने से राज्य को ५३०० करोड़ रुपए की आय की क्षति हुई है वह भी केंद्र से हासिल करने में मुख्यमंत्री पलनीस्वामी असमर्थ हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य पर कर्ज का बोझ २०१९-२० में ३ लाख ९७ हजार करोड़ रुपए होने की आशंका है। आर्थिक दिवालियापन की ओर बढ़ती सरकार विकास कार्य नहीं करा सकती और न ही रोजगार सृजन कर सकेगी। ऐसे में १२०० करोड़ रुपए आवंटित कर ६० लाख परिवारों को २-२ हजार रुपए की वित्तीय मदद देनी की घोषणा क्यों की गई?
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि लाभार्थी परिवारों में करीब ३० लाख परिवार एआईएडीएमके सदस्यों के चिन्हित किए जाने की खबर है। सरकार की यह घोषणा एआईएडीएमके के वोट बैंक को मजबूत करने के इरादे से है। हम इस घोषणा की कड़ी आलोचना करते हैं। पार्टी ने चुनाव आयोग को इस सिलसिले में शिकायत पत्र भेजा है। खुद की पार्टी के लाभ के लिए सरकारी खजाने का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारी मांग है कि ६० लाख चिन्हित परिवारों की सूची ऑनलाइन प्रकाशित की जाए और साथ ही सभी ग्रामसभाओं में जनता के अवलोकन के लिए चस्पा की जाए।