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भयावह कोरोमंडल ट्रेन दुर्घटना : कोच थर्राया और हम नीचे गिर पड़े, दुर्घटनास्थल पर बिखरे पड़े डिब्बे

ट्रेन के कुछ यात्री ओडिशा से हवाई मार्ग से चेन्नई लौटे

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भयावह कोरोमंडल ट्रेन दुर्घटना : कोच थर्राया और हम नीचे गिर पड़े, दुर्घटनास्थल पर बिखरे पड़े डिब्बे

भयावह कोरोमंडल ट्रेन दुर्घटना : कोच थर्राया और हम नीचे गिर पड़े, दुर्घटनास्थल पर बिखरे पड़े डिब्बे


चेन्नई. ओडिशा के बालासोर के पास तीन ट्रेनों के आपस में टकरा जाने से 261 लोगों की मौत हो गई। हजार से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। इस बीच करीब पचास लोग विमान पकड़ कर चेन्नई पहुंचे। इन लोगों ने दुर्घटना का जो मंजर सुनाया वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
उल्लेखनीय है कि कोरोमंडल एक्सप्रेस बेपटरी हुई यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस में जा घुसी और कुछ कोच पास ही खड़ी मालगाड़ी से भी जा भिड़े। इस दशक का यह सबसे बड़ा रेल हादसा है जिसने कई परिवार उजाड़ दिए।
एक्सप्रेस के वे डिब्बे जिनको ज्यादा क्षति नहीं पहुंची थी में सवार यात्रियों को प्राथमिक उपचार देकर वहां से रवाना किया गया है। ऐसे में कुछ यात्रियों ने चेन्नई के लिए फ्लाइट पकड़ी। भुवनेश्वर से एक विशेष ट्रेन यात्रियों के साथ रविवार सुबह पहुंचने वाली है।
सबकुछ उथल-पुथल, चीखें
एयरपोर्ट पर यात्रियों ने पत्रकारों को बताया कि बड़े ही भयावह ढंग से ट्रेन उस वक्त हिलने लगी थी मानो भूचाल आया हो। सारे यात्री धड़ाम से गिरने लगे। फिर हमें मौत की चीखें सुनाई पड़ने लगी। घायलों की पीड़ा को हम सुन पा रहे थे। ट्रेन के कोच पटरियों के आस-पास बिखरे पड़े थे। हम पूरी तरह भयभीत थे। बचाव दल के कर्मियों ने हमें कोच से बाहर निकाला। प्राथमिक उपचार देने के बाद आगे की व्यवस्था की गई।

दिल दहला देने वाली पुकार
मैं उन दिल दहला देने वाली चीखों-पुकारों को शायद पूरी जिन्दगी नहीं भूल पाऊंगा। मैं झारखंड में सपरिवार बसा हूं और यूनियन कार्यालय में सेवारत हूं। हम 2 टियर एसी में सफर कर रहे थे। बीती रात करीब सात बजे पूरा कोच हिलने लगा। हम सब नीचे गिर गए। हमको ट्रेन के बेपटरी पर होने की सूचना मिली लेकिन अहसास नहीं था कि इतना बड़ा हादसा हो चुका है। ट्रेन में आग नहीं लग जाए इसलिए हम चिल्लाते हुए बाहर भागे। हमारी कोच से आगे के सभी कोच चूर-चूर हो गए थे। कुछ कोच पास की दूसरी ट्रेन से टकरा गए थे। दुर्घटनाग्रस्त यात्रियों की चीख-पुकार दिल दहला देने वाली थी। वहां खड़ा रहना बड़ा डरावना भी था और हम कुछ करने की िस्थति में भी नहीं थे। इसलिए हम तुरंत वहां से भुवनेश्वर के लिए रवाना हो गए। मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि ऐसी घटना होगी।

तेनकाशी जिला मूल के रमेश