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मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी के कोरोना वैरिएंट पर असरदार होने का दावा

चेन्नई के दो निजी अस्पतालों ने की शुरूमोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी के कोरोना वैरिएंट पर असरदार होने का दावा

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covid-19

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चेन्नई. मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी से नई आस जगीहै। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह दवा भारत में पाए गए पहले कोरोना वैरिएंट पर भी कारगर है। चेन्नई के दो निजी अस्पतालों कावेरी अस्पताल और ग्लेनीगल्स ग्लोबल हेल्थ सिटी अस्पताल ने कोविड -19 रोगियों के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी शुरू की है। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी हानिकारक रोगजनक वायरस से लड़ने की प्रतिरक्षा प्रणाली की क्षमता की नकल करते हैं. ऐसा एंटीबॉडी कॉकटेल पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को दिया गया था जब वे कोरोना से संक्रमित हुए थे। इस तरह का मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल अमेरिका और यूरोप में खूब दिया जाता है. इसे लेकर अनुभव यह है कि कोरोना संक्रमण के पहले सात दिनों में जब यह दिया जाता है तो 70 से 80 फीसदी लोग, जिन्हें अस्पताल जाने की जरूरत पड़ती, उन्हें यह कॉकटेल देने के बाद अस्पताल में भर्ती की जरूरत नहीं पड़ती है
इंजेक्शन के माध्यम से दे रहे
एंटीबॉडी कॉकटेल दवा कासिरिविमैब और इम्देवीमैब दो लैब इंजीनियर एंटीबॉडी का एक संयोजन है। दवा को या तो अंतःशिरा या चमड़े के नीचे (त्वचा के नीचे) मार्ग के माध्यम से एक जलसेक या इंजेक्शन के माध्यम से दिया जाता है, और शरीर में प्रवेश करने के तुरंत बाद सक्रिय हो जाता है। हल्के लक्षणों वाले 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों को भी दवा दी जा सकती है
क्या है यह कॉकटेल
एंटीबॉडी कॉकटेल दो दवाओं का मिश्रण है, जो किसी वायरस पर एक जैसा असर करती हैं. यह कॉकटेल एंटीबॉडी दवा में कोरोना वायरस पर समान असर करने वाली एंटीबॉडीज का मिश्रण है. एंटीबॉडी-ड्रग कॉकटेल कैसिरीविम्ब और इम्डेविम्ब को स्विस कंपनी रोचे ने रिगनेरोन के साथ मिलकर तैयार किया है और भारतीय कंपनी सिप्ला इसकी मार्केटिंग सहयोगी है। ये प्रोटीन वायरस से लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम की क्षमता की कॉपी करते हैं, जिससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
मिली मंजूरी
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने हाल ही में एंटीबॉडी कॉकटेल को इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन दिया है। इसके अलावा दवा को अमेरिका और यूरोपीय संघ के कई देशों में पहले से मंजूरी हासिल है।
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अस्पताल में भर्ती होने से बच सकेंगे
जो हल्के लक्षणों के साथ कोविड -19 के अपने प्रारंभिक चरण में हैं, इससे वायरस के गुणन को कम करने में मदद मिलेगी। इस प्रकार गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने से बचा जा सकेगा। जब संक्रमण के शुरुआती लक्षणों की शुरुआत के दस दिनों के भीतर रोगियों को हमेशा की पेशकश की जाती है, तो यह उपचार 70% तक अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता को कम कर सकता है या उससे भी बच सकता है। 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों को हल्के लक्षणों के साथ भी सुरक्षित और प्रभावी ढंग से दवा दी जा सकती है।
- डॉ अनीता रमेश, वरिष्ठ सलाहकार, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, कावेरी अस्पताल, चेन्नई।
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