
Fair delimitation : तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके की अगुवाई में शनिवार को आहूत निष्पक्ष परिसीमन पर पहली संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) की बैठक में वक्ताओं ने एकसुर में कहा कि जनसंख्या नियंत्रण नीति को सफलतापूर्वक लागू करने वाले राज्यों की न तो सीटें कम होनी चाहिए और न ही उनकी आवाज को दबाया जाना चाहिए। बैठक में शामिल नेताओं ने सीएम एमके स्टालिन के इस पहल की सराहना की। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री ने बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है। हम साथ मिलकर काम करेंगे और सफलता प्राप्त करेंगे। इसी मूलमंत्र के साथ वे बोले कि आबादी आधारित परिसीमन की सोच भाजपा की ओर से तकनीकी समायोजन नहीं बल्कि राजनीतिक आघात है। इसी से जुड़े एक प्रश्न पर उनकी प्रतिक्रिया थी कि राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर ही वे इस बैठक में शामिल हुए हैं। निष्पक्ष परिसीमन को लेकर पार्टी नेतृत्व की ओर से भी अपना पक्ष जल्द ही स्पष्ट कर दिया जाएगा।
शिवकुमार ने केंद्र सरकार की ओर से हो रही उपेक्षा का हवाला देते हुए कहा कि कर्नाटक से लाखों करोड़ का कर राजस्व केंद्र को जाता है लेकिन बदले में उसे एक रुपए के एवज में मात्र 13 पैसे मिलते हैं। राज्य के साथ आर्थिक अन्याय पूरी तरह व्यिस्थत चूक है। राज्य की आबादी देश की कुल जनसंख्या की पांच फीसदी है जबकि जीडीपी में योगदान 8.4 प्रतिशत का है। हमारा प्रश्न है कि देश की जीडीपी में करीब 35 फीसदी योगदान करने वाले दक्षिणी राज्यों पर आबादी आधारित परिसीमन क्यों थोपा जाना चाहिए? उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह हमारी हजारों साल पुरानी पहचान, संस्कृति और विरासत के संरक्षण का संघर्ष है।
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (KTR) ने कहा, 'हम प्रस्ताव कर रहे हैं कि केंद्र सरकार को राज्य के भीतर विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ानी चाहिए ताकि जहां भी जनसंख्या में वृद्धि हो, प्रतिनिधित्व, बेहतर प्रशासन और विकेंद्रीकरण की चुनौतियों से निपटा जा सके… क्योंकि सांसदों की संख्या में छेड़छाड़ संघीय संतुलन को बिगाड़ देगी'।
उन्होंने प्रश्न किया, केवल जनसंख्या ही परिसीमन का मानदंड क्यों होनी चाहिए? राजकोषीय योगदान, विकास या प्रगति क्यों नहीं?… हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व को पुराने घावों को भरने का प्रयास करना चाहिए, न कि नए घाव बनाने का… यदि भारत को वास्तव में 2047 तक महाशक्ति बनना है, तो आज का क्रम सहकारी संघवाद है, न कि बलपूर्वक संघवाद।'
तेलंगाना कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष महेश गौड़ ने कहा कि बैठक में हमारे मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट कर दिया कि परिसीमन के नाम पर उनके राज्य को होने वाले किसी भी क्षति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अप्रेल महीने में हैदराबाद में एक विराट सम्मेलन आयोजित किया जाएगा जिसमें जेएसी के सारे प्रतिनिधि शामिल होंगे। उन नेताओं को भी बुलाया जाएगा जो किसी कारणवश शनिवार की बैठक में शामिल नहीं हो सके। यह सम्मेलन परिसीमन के दुष्परिणामों पर जनता की आंख खोलने वाला साबित होगा जिसके जरिए केंद्र सरकार को हम स्पष्ट संदेश भेजेंगे कि संसद में दक्षिणी राज्यों की आवाज और प्रतिनिधित्व कम नहीं होना चाहिए।
शुरुआत में तमिलनाडु के डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन ने बैठक की रूपरेखा बताई जबकि सांसद कनिमोझी ने सभी का स्वागत किया। बैठक में बीजू जनता दल के संजय कुमार दास परमा, अमर पटनायक, शिरोमणि अकाली दल के सरदार बलविंदर सिंह, केरल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम, केरल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के राज्य महासचिव सलाम, केरल रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के प्रेमा चंद्रन, केरल कांग्रेस पार्टी के राज्य अध्यक्ष कुंभकुडी सुधाकरन, तेलंगाना ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी के इम्तियाज जलील, जोस के. मणि और अन्य सांसद और नेता मौजूद थे।
Published on:
22 Mar 2025 07:18 pm

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