
महामारी के बावजूद पिछले एक साल में आईआईटी मद्रास ने लहराया विकास का परचम
चेन्नई.
महामारी के बावजूद आईआईटी मद्रास के लिए वर्ष 2021 उपलब्धियों भरा रहा। संस्थान में इस साल कई बड़े विकास के कार्य हुए। इसी साल संस्थान में डिस्कवरी कैम्पस नाम से 1000 करोड़ रुपए की लागत से बने सेटेलाइट कैम्पस का उद्घाटन किया गया। यही नहीं संस्थान ने एनआईआरएफ रैंकिंग्स 2021 में ओवरआल एवं इंजीनियरिंग श्रेणी में देश में नम्बर 1 रैंक की अपनी स्थिति को कायम रखा। आईआईटी मद्रास ने आईआईटी मद्रास शास्त्रा नाम से टेक मैगजिन की शुरुआत की जो किसी भी भारतीय शिक्षण संस्थान का अपनी तरह का पहला प्रयास रहा। संस्थान ने कैम्पस प्लेसमेंट के पहले चरण में जॉब आफर में ऐतिहासिक सफलता हासिल की। 73 प्रतिशत विद्यार्थियों को जॉब आफर मिला।
देश के पहले स्वदेशी व्हीलचेयर वाहन का किया विकास
आईआईटी मद्रास ने इस साल निओबोल्ट नाम से देश के पहले स्वदेशी व्हीलचेयर मोटरचालित वाहन का विकास किया। इसका उपयोग न सिर्फ सड़क बल्कि असमान भूभागों पर भी किया जा सकता है। इसमें लिथियम आयन बैट्री है।
कोरोना से जुड़े प्रयास
संस्थान ने कोविड 19 शोध के विभिन्न क्षेत्रों में कई रिसर्च किए। इसमें मोबाइल फोन ऐप्प के लिए ब्लाकचेन आधारित हेल्थकेयर सूचना प्रणाली तथा कोरोना वायरस एवं टीबी के फैलाव को रोकने के लिए एयर सैनिटाइजेशन टेक्नालाजी शामिल है। इसके अलावा संस्थान द्वारा ब्रेथ पैटर्नस एवं संक्रमण के जोखिम पर भी शोध किए गए। इसके साथ ही आईआईटी मद्रास के भारत एवं विदेश के एलुमनी ने देश में कोरोना राहत प्रयासों के लिए 2 मिलियन यूएस डॉलर से अधिक का योगदान दिया। इसके साथ ही आईआईटी मद्रास के भारत एवं विदेश के एलुमनी ने देश में कोरोना राहत प्रयासों के लिए 2 मिलियन यूएस डॉलर से अधिक का योगदान दिया।
Published on:
29 Dec 2021 10:31 pm

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