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भक्तों ने खींची लकड़ी की कारें

चित्तिरै उत्सव 2 मई को संपन्न होगा

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भक्तों ने खींची लकड़ी की कारें

भक्तों ने खींची लकड़ी की कारें

चेन्नई/कोयम्बत्तूर. मदुरै में विश्व प्रसिद्ध मीनाक्षी-सुंदरेश्वर मंदिर का चित्तिरै थेरोट्टम (कार उत्सव) शुरू हुआ। महोसत्व की शुरुआत भगवान सुंदरेश के 56 फीट ऊंचे द्वाजस्तंभ (ध्वजस्तंभ) पर पारंपरिक तरीके से पवित्र ध्वज फहराने के साथ हुई। यह यहां जारी 12 दिवसीय वार्षिक चित्तिरै ब्रह्मोत्सव के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया। इस उत्सव में शामिल होने के लिए अलसुबह से ही सडक़ों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटना शुरू हो गए। जुलूस निकालने से पहले भगवान सुंदरेश और देवी पिरियाविदै की विशेष पूजा-अर्चना की गई। यह उत्सव 2 मई को संपन्न होगा।
जुलूस के दौरान भक्तों ने पूरी तरह सजी हुई लकड़ी की कारों को खींचकर उत्सव मनाया, जिसमें एक कार में भगवान सुंदरेश और देवी मीनाक्षी की मूर्तियां विराजित की गई और दूसरी कार में देवी मीनाक्षी की प्रतिमा विराजित कर पूर्वी मासी सडक़ से हर हर शंकर, मीनाक्षी सुंदरा का जाप करते हुए जुलूस निकाला गया। यात्रा की व्यवस्था के लिए हजारों पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई। इसके अलावा जुलूस में लकड़ी की छोटे कारों में भगवान विनायग, भगवान मुरुगन और भगवान नयनमार्स की प्रतिमाएं विराजित थी। तमिल महीने चित्तिरै में मनाए जाने वाले कार उत्सव में राज्य के विभिन्न हिस्सों से भक्त पहुंचते हैं।
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कल्लाज्हागा (विष्णु के अवतार) सोने के घोड़े पर सवार होकर अपनी बहन मीनाक्षी और भगवान सुन्दरेश की शादी में यहां आए थे। कहते हैं कि भगवान शिव सुन्दरेश के रूप में अपने गणों के साथ मीनाक्षी देवी से विवाह करने के लिए मदुरै आए थे। मीनाक्षी को देवी पार्वती का अवतार ही माना जाता है। इस त्योहार में कई धार्मिक संस्कार होते हैं, जिनमें मीनाक्षी देवी का राज्याभिषेक, रथ उत्सव और देवताओं का विवाह आदि शामिल हैं। इस उत्सव का समापन भगवान विष्णु के अवतार भगवान कल्लाज्हगा को मंदिर में वापस लाने के साथ होता है।
चित्तिरै ब्रह्मोत्सव के दौरान भक्तों ने पूरी तरह सजे हुए लकड़ी के रथों को खींचकर धूमधाम से उत्सव की शुरुआत की। इन रथों को खींचने के लिए देश विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।