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वैचारिक मंथन के बाद बोले स्टालिन केंद्र के अध्यादेश का डीएमके करेगी पुरजोर विरोध

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आलवारपेट िस्थत मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर उनसे मुलाकात की  

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चेन्नई. देश की राजधानी की प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण के केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ राजनीतिक दलों को जोड़ने के अभियान में जुटे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके का गुरुवार को समर्थन हासिल कर लिया। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आलवारपेट िस्थत मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर उनसे मुलाकात की। करीब एक घंटे तक इनमें आपसी वार्ता हुई। फिर दोनों नेता मीडिया से मुखातिब हुए।

2024 का सेमीफाइनल

सीएम केजरीवाल ने कहा, “अगर निर्वाचित सरकार का नौकरशाहों पर नियंत्रण नहीं है, तो निर्वाचित सरकार होने का कोई मतलब नहीं है। इतिहास में पहली बार उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। यह असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है।” उन्होंने कहा, यह अध्यादेश मानसून सत्र में आएगा। राज्यसभा में उनके पास 93 सीटें हैं, अगर सभी गैर-भाजपा दल साथ आते हैं, तो हम उन्हें हरा पाएंगे। डीएमके के समर्थन के लिए वे एमके स्टालिन के आभारी हैं। हर गुजरते दिन के साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा है और यह 2024 का सेमीफाइनल है।

आज मिलेंगे हेमंत सोरेन से

गौरतलब है कि अभियान के तहत केजरीवाल शुक्रवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलने वाले हैं। केजरीवाल पहले ही ममता बनर्जी, शरद पवार, उद्धव ठाकरे, नीतीश कुमार और उनके डिप्टी तेजस्वी यादव सहित कई प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों से मिल चुके हैं।

भाजपा बना रही आप पर दबावमुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा, “अरविंद केजरीवाल एक अच्छे मित्र हैं…। मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार उपराज्यपाल के माध्यम से दिल्ली में आप सरकार पर दबाव बना रही है। दिल्ली सरकार के खिलाफ लाए जाने वाले अध्यादेश का डीएमके पुरजोर विरोध करेगी। हमने दूसरे नेताओं के विचारों पर भी चर्चा की और मैं सभी नेताओं से अरविंद केजरीवाल का समर्थन करने की अपील करता हूं।” अरविन्द केजरीवाल के साथ आप सांसद संजय सिंह, सांसद राघव चड्ढा और दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी मौजूद थी।

यह है अध्यादेश

गौरतलब है कि केंद्र ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और दानिक्स कैडर के अधिकारियों के तबादले और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण बनाने के उद्देश्य से हाल ही में एक अध्यादेश जारी किया था। उच्चतम न्यायालय के दिल्ली में निर्वाचित सरकार को पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि से संबंधित मामलों को छोड़कर अन्य मामलों का नियंत्रण सौंपने के बाद यह अध्यादेश लाया गया।