20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

खेली फूलों की होली, सुदामा चरित्र का किया वर्णन, सजाई झांकी

गूंजे कृष्ण के जयकारे

2 min read
Google source verification
flowers holi

flowers holi

सच्चा मित्र वहीं है जो अपने मित्र को निस्वार्थ भाव से प्यार करे और विपत्ति आने पर उसकी सहायता करे। सच्ची दोस्ती में छल और कपट नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से पाप होता है। वृन्दावन वाले पंडित बजरंग शास्त्री महाराज ने यह बात कही। वे यहां अन्नानगर शांति कॉलोनी स्थित श्री रामदयालकलावती खेमका अग्रवाल सभा भवन में श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करा रहे थे। श्री अग्रवाल सभा की इकाई श्री अग्रवाल सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित कथा के दौरान उन्होने भगवान की अलग-अलग लीलाओं को सुनायाष इस दौरान फूलों की होली खेली गई। भगवान श्री कृष्ण के जीवन चरित्र की सभी महत्वपूर्ण गाथाओं का वर्णन किया। सुदामा की कथा का वर्णन सुनकर भक्त भाव विभोर हो गए और कथा पंडाल में श्री कृष्ण के जयकारे लगने शुरू हो गए। हमें अपने जीवन का प्रत्येक पल ईश्वर भक्ति में व्यतीत करना चाहिए। हमें हर सांस में ईश्वर का नाम लेना चाहिए। एक भी सांस व्यर्थ नहीं जाना चाहिए।
पंडित बजरंग शास्त्री महाराज ने कहा कि भक्त सुदामा ने श्री कृष्ण के बालपन में अपनी आयु व्यतीत की सौभाग्य से उनके सहपाठी बनें। समय के परिवर्तन में सुदामा ने अपने परिवार को गरीबी में पाला और श्री कृष्ण द्वारकाधीश बने। पत्नी के बार- बार कहने पर अपने मित्र श्री कृष्ण जी को मिलने गये। सुदामा इतने निर्धन थे कि उन्होंने पत्नी द्वारा लोगों से मांग कर लाए गए दो मुट्ठी चावल द्वारकाधीश को भेंट करने के लिए साथ ले चले। सुदामा पूछते हुए राजमहल गए और किसी ने श्री कृष्ण का मित्र होने का विश्वास नहीं किया। एक द्वारपाल ने द्वारकाधीश को सूचित किया। इतना सुनते ही श्री कृष्ण मित्र सुदामा-सुदामा कहते हुए दौड़ पड़े। श्रीकृष्ण अपने रथ पर बिठाकर सुदामा को राज भवन लाए और उनका मान सम्मान किया।
शुकदेव की विदाई और महाराजा परीक्षित को मोक्ष का प्रसंग सुनाया गया। भक्तों को कथा रसपान कराते हुए कहा कि हमेशा धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए, कर्म करो लेकिन, फल की इच्छा मत करो। भगवान हमेशा सच्चे भक्तों में ही वास करते है। सुदामा चरित्र का बखान करते हुए कहा कि संसार में मित्रता भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होनी चाहिए। जिनकी कथा में सश्ची मित्रता दर्शाई गई है। आधुनिक युग में स्वार्थ के लिए लोग एक दूसरे के साथ मित्रता करते हैं और काम निकल जाने पर लोग एक दूसरे को भूल जाते हैं। जीवन में प्रत्येक प्राणी को परमात्मा से एक रिश्ता जरूर बनाना चाहिए। भगवान से बनाया गया वह रिश्ता जीव को मोक्ष की ओर ले जाएगा। सुदामा ने विपरीत परिस्थितियों में अपने सखा कृष्ण का चिंतन और स्मरण नहीं छोड़ा। जिसके फलस्वरूप कृष्ण ने भी सुदामा को परम पद प्रदान किया। श्री अग्रवाल सभा के अध्यक्ष इन्द्रराज बंसल ने बताया कि कथा में महानगर के विभिन्न स्थानों से भक्तगण शामिल हुए।