
Tamilnadu फुटपाथ पर सजी दुकानों से राहगीरों की जान सांसत में
चेन्नई. महानगर में सड़कों की साइड में निर्मित फुटपाथ बनाने का उद्देश्य है आमजन का सुरक्षित रोड से गुजरना। वे बिना किसी बाधा के सहजता व सुरक्षा के साथ सड़क के फुटपाथ पर चलकर गंतव्य तय कर सके। लेकिन विडम्बना है कि महानगर के सभी प्रमुख मार्गों के फुटपाथों पर अतिक्रमियों ने कब्जा कर रखा है। वे बिना किसी भय के बेधड़क अपना व्यापार चला रहे हैं और उनको कोई हिलाने वाला नहीं। वे यही समझते कि यह राहगीरों के अधिकार के साथ खिलवाड़ है। उनको तो केवल अपनी कमाई से लेना-देना है राहगीरों की जान या सुरक्षा से क्या लेना-देना। हालांकि एक सप्ताह पहले मद्रास हाईकोर्ट ने ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन को फटकार लगाते हुए यह आदेश दिया था कि वह महानगर के सभी फुटपाथों से अतिक्रमण हटवाए और राहगीरों के अधिकार व सुरक्षा के प्रति संजीदगी दिखाए। लेकिन फुटपाथों पर किए गए अतिक्रमियों के कब्जे को देखने से तो यह प्रतीत होता है कि संभवत: ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन और अतिक्रमियों के बीच कहीं न कहीं सांठगांठ है।
एलआईसी के आसपास का फुटपाथ भी खाली नहीं
बतादें कि महानगर का प्रमुख मार्ग अण्णा सालै जो यहां की जीवनरेखा भी कहलाती है पर स्थित एलआईसी के आसपास का फुटपाथ भी अतिक्रमण से खाली नहीं है। इस रोड के फुटपाथ पर भी कई जगह फूड प्लाजा बने हुुए हंै। इसी प्रकार एत्तिराज सालै के फुटपाथ पर भी खाने पीने की स्टॉलें लंबे समय से लगी हुई हैं जबकि इस मार्ग पर महिला कॉलेज स्थित है, कॉलेज की छात्राएं यहां के फुटपाथ का इस्तेमाल नहीं कर पाती। यही दशा कमोबेश कॉलेज रोड, वुड्स रोड, हैडोज रोड, नुंगम्बाक्कम हाई रोड के फुटपाथों की है जिन पर कॉलेज की छात्राएं और अन्य राहगीरों का आवागमन होता है। फुटपाथ पर अतिक्रमण के कारण उनको सड़क से चलना पड़ता है।
बिना किराए चलाते हैं दुकान
स्पेंसर फुटपाथ से आवाजाही कर रही एक छात्रा नंदिता का कहना था कि यहां के फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले हर दिन हजारों रुपए का व्यापार बिना किराया चुकाए करते हैं। इस फुटपाथ पर किया गया अतिक्रमण बिना प्रशासनिक मिलीभगत के नहीं हो सकता। ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन के अधिकारियों की मिलीभगत से फुटपाथ पर अतिक्रमियों ने कब्जा जमा रखा है। यदि प्रशासन चाहे तो चंद मिनटों में अतिक्रमण हटाया जा सकता है लेकिन ऐसा होगा नहीं।
खतरनाक है सड़क पर चलना
एत्तिराज कॉलेज की छात्रा दीपिका वैद्यनाथ का कहना था कि शाम के समय पीक अवर्स में एत्तिराज सालै पर चलना बेहद कठिन होता है। हालांकि इसका फुटपाथ तो चार फीट से भी ज्यादा चौड़ा है, लेकिन इस फुटपाथ पर चाय एवं अन्य खाद्य सामग्री की दुकानें वर्षों से जमा हैं। ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन के अधिकारी जानते हुए भी इन अतिक्रमियों पर कार्रवाई नहीं करते। नतीजतन महानगर के ७० प्रतिशत फुटपाथों को लोग अतिक्रमण कर अपना हित साध रहे हैं।
अतिक्रमियों को राजनीतिक संरक्षण
लोयला कॉलेज की छात्रा संगीता रानी ने कहा कि अतिक्रमियों को राजनीतिक पार्टियों और नेताओं का संरक्षण मिला हुआ है। वे अपने वोट बैंक के कारण इन अतिक्रमियों के प्रति नरम रवैया अपनाते हैं। फुटपाथ पर चलने वालों का कोई वजूद नहीं मानकर सरकार और प्रशासन आमजन के अधिकारों की रक्षा की बात तो भूल ही जाते हैं।
Published on:
30 Nov 2019 01:54 pm
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