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जंगली जानवरों से बचाव के लिए किसानों ने मांगा बंदूक रखने का लाइसेंस

किसानों का कहना है कि जब जंगली जानवर खेतों एवं बागानों में घुस जाते हैं तो उन्हें फसल से अधिक अपनी जान बचाने की चिंता सताने लगती है

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For protection against wild animals farmers demand License to keep gun

जंगली जानवरों से बचाव के लिए किसानों ने मांगा बंदूक रखने का लाइसेंस

दिंडिगुल. थांडिकुड़ी इलाके के भूमि मालिकों एवं किसानों ने जंगली जानवरों से अपनी सुरक्षा की खातिर बंदूक रखने के लिए लाइसेंस प्राप्त करने का आवेदन करने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि यह इलाका भिंडी, आलू, गोभी, गाजर, चुकंदर, टमाटर, कॉफी एवं केले के बागान के लिए मशहूर है। ये फल एवं सब्जियां आदि पिछले कई सालों से थांडिकुड़ी एवं कोडैकनाल के पहाड़ी इलाकों में उगाई जाती हैं। यहां से ये सब्जियां मदुरै एवं बादलगुंडु समेत राज्य के कई इलाकों में भेजी जाती हैं। इतना होने के बावजूद यहां के किसानों एवं भूमि मालिकों को जंगली जानवरों से अपनी फसल बचाने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जब जंगली शूअर, हाथी एवं हिरण आदि जंगली जानवर उनके खेतों एवं बागानों में घुस जाते हैं तो उन्हें अपनी फसल से अधिक अपनी जान बचाने की चिंता सताने लगती है। अमूमन ये जानवर रात के समय आते हैं। अंधेरा होने के कारण रात में खतरा और बढ़ जाता है। किसानों ने बताया कि जानवरों द्वारा बार-बार फसल बर्बाद किए जाने के बाद भी उनके नुकसान के कारणों का सही समाधान नहीं निकल रहा है। यह देखते हुए ही यहां के जमीन मालिकों के समूह तथा कुछ बड़े किसानों ने मिलकर अपने और अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए बंदूक रखने का लाइसेंस प्राप्त करने का निर्णय लिया है। भारतीय किसान संघ के जिला उपाध्यक्ष एवं इलाके के निवासी शिवकुमार ने कहा कि पहाड़ी गांवों के लोग जंगली जानवरों के आतंक के साए में जीने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि इस बारे में वे वन विभाग के अधिाकरियों से भी चर्चा कर चुके हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ही यहां के किसानों ने मिलकर जिला प्रशासन के पास अपनी सुरक्षा के लिए बंदूक का लाइसेंस प्राप्त करने की याचिका लगाई है। किसानों का दावा है कि जानवरों के चलते पिछले कई सालों उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। जिला कलक्टर टी. जी. विनय ने कहा कि जिला प्रशासन को इस समस्या की जानकारी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि वन विभाग के अधिकारियों से चर्चा करने के बाद किसानों को बंदूक का लाइसेंस देने के बारे में फैसला किया जाएगा।