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विदेश मंत्री जयशंकर का चीन-पाकिस्तान पर सख्त संदेश, संप्रभुता से समझौता नहीं

भारत ने अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करने का संकेत देते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को चेन्नई स्थित IIT Madras के एक कार्यक्रम में चीन और पाकिस्तान के हालिया रवैये पर सख्त बयान दिया।

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External Affairs Minister Jaishankar sends a strong message to China and Pakistan: No compromise on sovereignty.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को चेन्नई स्थित IIT Madras के एक कार्यक्रम में चीन और पाकिस्तान के हालिया रवैये पर सख्त बयान दिया।

भारत ने अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करने का संकेत देते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को चेन्नई स्थित IIT Madras के एक कार्यक्रम में चीन और पाकिस्तान के हालिया रवैये पर सख्त बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत वैश्विक जिम्मेदारियों का निर्वहन करता रहेगा और किसी भी दबाव या भू-राजनीतिक चुनौतियों से देश के मूल रुख में कोई बदलाव नहीं होगा।

चीन के कदमों पर दो टूक

जयशंकर ने चीन के हालिया कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश के एक भारतीय नागरिक की हिरासत और उत्पीड़न जैसी घटनाएं जमीनी सच्चाई को नहीं बदलतीं। उन्होंने दोहराया, "अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा।" विदेश मंत्री ने क्षेत्रीय अखंडता को लेकर भारत के स्पष्ट और दृढ़ रुख पर जोर दिया।

पाकिस्तान को लेकर कड़ा रुख

पाकिस्तान के संदर्भ में जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी देश द्वारा आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के चलते भारत को कड़े फैसले लेने पड़े हैं। उन्होंने कहा, "दशकों की हिंसा के बाद अब कोई भारत को अपनी रक्षा के तौर-तरीकों पर उपदेश नहीं दे सकता।" जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि सतत सीमा-पार आतंक के माहौल में सामान्य संबंध संभव नहीं हैं और ऐसे हालात में संवाद तोड़ना भारत का वैध अधिकार है।

भारत का वैश्विक दृष्टिकोण

विद्यार्थियों से संवाद करते हुए विदेश मंत्री ने भारत के वैश्विक दृष्टिकोण को सभ्यता-राज्य बताया, जिसने आधुनिक और तकनीक-आधारित राष्ट्र में रूपांतरण किया है। उन्होंने कहा, "भारत का दृष्टिकोण गैर-पश्चिमी है, लेकिन पश्चिम विरोधी नहीं।" देश अपनी संस्कृति और मूल्यों में आत्मविश्वास से प्रेरित है।

वैश्विक संकटों में भारत की भूमिका

यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि वैश्विक संकटों ने आपूर्ति शृंखला की कमजोरी और अत्यधिक निर्भरता के खतरों को उजागर किया है। उन्होंने बताया कि भारत ने खाद्य, ईंधन और वित्त की कमी के समय अपने संसाधन साझा किए हैं। विदेश मंत्री ने यह विश्वास जताया कि युद्ध अधिक समय तक नहीं चल सकते।

पड़ोसी देशों के साथ सहयोग

बांग्लादेश को लेकर जयशंकर ने कहा कि भारत हमेशा सहयोगी और भरोसेमंद पड़ोसी बनने का प्रयास करता है। अफगानिस्तान के संदर्भ में उन्होंने बताया कि भारत वहां सामाजिक संबंधों और जनता-केंद्रित नीति के तहत सहायता जारी रखे हुए है, जिसमें खाद्य, वैक्सीन, कृषि और विकास सहायता शामिल है।

विदेश मंत्री जयशंकर के इन स्पष्ट बयानों से भारत के क्षेत्रीय अखंडता, सुरक्षा और वैश्विक जिम्मेदारी पर अडिग रहने का संदेश साफ तौर पर सामने आया है।