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मानसून से पहले चेन्नई की सड़कों पर गड्ढों को भरने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (जीसीसी) ने मानसून से पहले शहर की सड़कों पर गड्ढों को भरने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। जीसीसी ने मुम्बई से 2 जेट पैचर मशीनें किराए पर ली हैं, जो सड़कों में हुए घावों को मिनटों में भर देगी

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चेन्नई. मानसून नजदीक आ रहा है और समय बहुत कम है। मानसून से पहले ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (जीसीसी) अब सड़कों की मरम्मत के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। जीसीसी ने चेन्नई में सड़कों पर गड्ढों को तुरंत ठीक करने के लिए मुम्बई से 2 जेट पैचर मशीनें किराए पर ली हैं।

जीसीसी के मुख्य अभियंता राजेंद्रन ने बताया कि जैट पैचर मशीन सड़कों में हुए घावों को मिनटों में भर देगी और सड़क तुरंत गड्ढ़ा मुक्त हो जाएगी। जेट पैचर मशीन ऑटोमेटिक मशीन है। इसमें सड़क मरम्मत का मेटीरियल कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से तैयार होगा। मशीन में ही तारकोल रोड़ी करेसर व अन्य मैटीरियल मिक्स किया जाता है। साथ ही इस तकनीक का इस्तेमाल जरूरत के आधार पर आपात स्थिति में भी किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल में यातायात या वाहनों की आवाजाही को बंद करने की जरूरत भी नहीं होती है।

1000 गड्ढों की पहचान की

जीसीसी आयुक्त डा. जे राधाकृष्णन ने बताया कि अब तक 1000 गड्ढों की पहचान की है। हर दिन करीब 50 गड्ढों को ठीक किया जा रहा है और यह काम इस महीने के अंत तक जारी रहेगा। जेट पैचर तकनीक से शहर की सड़कों पर पैच वर्क किसी भी मौसम में किया जा सकता है। इन मशीनों से जाने वाली कॉम्पैक्शन नियमित पैच वर्क की तुलना में बेहतर है।

सामाजिक कार्यकर्ता दयानंद कृष्णन के अनुसार जेट पैचर अब आमतौर पर पूरी दुनिया में उपयोग किए जाते हैं। उन्होंने जीसीसी के लिए ऐसी और मशीनें रखने की आवश्यकता के बारे में बात की। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि जेट पैचर्स को ताम्बरम निगम को भी भेजा जा सकता है।