
GhewarRam Seeravi
चेन्नई. कहते है इंसान की सोच उसे नया करने के लिए प्रेरित करती है। देश में जब कोरोना शुरुआती पांव पसारने लगा था तब लोगों में डर व झिझक अधिक थी। यहां तक कि लोग सब्जियों व फलों को खरीदने के बाद कुछ घंटों तक घर की दहलीज पर ही रख देते थे और बाद में उसे अच्छी तरह धोकर काम में लेते थे। कोरोना महामारी के बीच जब लॉकडाउन लगा तो बाजार बन्द थे। आवाजाही न के बराबर थी। लोग बाहर की चीजें खरीदने तक से परहेज करने लगे थे। ऐसे समय में राजस्थान मूल के चेन्नई प्रवासी घेवरराम सीरवी ने अपने घर की छत पर सब्जियां उगा दी।
पिताजी को खेती करते नजदीक से देखा था
घेवरराम सीरवी कहते हैं, मैं ग्रामीण परिवेश से आता हूं। मैंने मेरे पिता रामारामजी सीरवी को राजस्थान में खेती करते नजदीक से देखा है। कोरोना के समय लॉकडाइन लगा तो सब्जियां भी नहीं मिल रही थी। हमारे पास कुछ बीज पहले से थे। उन्हें कुछ गमलों औऱ कुछ कट्टों में मिट्टी डालकर उनमें बीज उगा दिए। कुछ दिन में ही ताजी व शुद्ध सब्जियां तैयार हो गई। पिछले एक साल में बाजार से सब्जी लाने की जरूरत ही नहीं रही। बल्कि कई बार पड़ौसियों को भी ताजी सब्जियां दीं। पहले हर महीने करीब तीन हजार रुपए की सब्जी बाजार से खरीदनी पड़ती थी, लेकिन अब सब्जी घर में ही मिल जाती है। ऐसे में पिछले एक साल में करीब छत्तीस हजार रुपए की सब्जियां बाजार से नहीं खरीदनी पड़ी।
घर के सभी सदस्यों का रहा सहयोग
छत पर तैयार किेए बगीचे में टमाटर, भिण्डी, ग्वारफली, मिर्ची, बैंगन, तरककडी, खीरा, तोरू, तुम्बा, करैला, तरबूज समेत विभिन्न किस्मों की सब्जियां व फल लगाए। घेवरराम सीरवी कहते हैं, रोजाना पानी पिलाने से लेकर खाद-बीज देने में पत्नी रमादेवी के साथ ही बेटियों सुनीता, अरुणा, आरती एवं पूजा ने मदद की।
जब चाहा ले ली
वे कहते हैं, अब सब्जियां लगाने के बाद ताजा व शुद्ध चीज मिल रही है। मौजूदा दौर में इम्यूनिटी जरूरी है और यह इन सब्जियों से मिल रही है। खास बात यह भी है कि जब चाहे यहां से सब्जी ले सकते हैं। सब्जियों में किसी तरह की मिलावट या कैमिकल का भी कोई डर नहीं है। इससे घर में एक स्वच्छ व शुद्ध वातावरण भी मिल रहा है।
Published on:
12 May 2021 05:47 pm
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