
सरकारी स्कूलों में अंगे्रजी बोलने की कक्षा लगाए सरकार : हाईकोर्ट
चेन्नई. मद्रास हाईकोर्ट ने सरकार से सरकारी विद्यालयों के पाठ्यक्रम में अंग्रेजी बोलने की कक्षा को भी शामिल करने के लिए कहा है।
डीएमके के पूर्व विधायक एम. अप्पावु द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को न्यायाधीश एम. सत्यनारायणन और न्यायमूर्ति पी. राजामाणिक्कम ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण निदेशालय को जल्द से जल्द सरकारी स्कूल पाठ्यक्रम में अंग्रेजी बोलने की कक्षाओं को भी शामिल करने की सलाह दी थी। इस दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु में तमिल के बाद अंग्रेजी द्वितीय भाषा के तौर पर जानी जाती है। तमिलनाडु से बाहर यहां के लोग कई बार इस भाषा का प्रयोग संपर्क भाषा के तौर पर भी करते हैं। इसके अलावा नौकरी आदि के साक्षात्कार के लिए भी अंग्रेजी का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। अंग्रेजी बोलने में अक्षम होने के कारण कई बार यहां के विद्यार्थियों को हीन भावना का शिकार भी होना पड़ता है। यह देखते हुए न्यायालय ने सरकार को शीघ्र ही सरकारी विद्यालयों के पाठ्यक्रम में अंग्रेजी बोलने की कक्षाओं को भी शामिल करने के लिए कहा। इस मशविरे के साथ ही न्यायालय ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण निदेशालय के निदेशक को ६ दिसम्बर तक जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए कहा है।
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार तमिलनाडु में लगभग ३७२११ सरकारी स्कूलें और ८४०३ सरकारी अनुदान प्राप्त विद्यालय हैं। इनके अलावा यहां सीबीएसई एवं मैट्रिकुलेशन बोर्ड के १२४१९ निजी विद्यालय भी हंै तथा निजी विद्यालयों के अलावा यहां के सरकारी स्कूलों में भी दूसरी से लकर 12वीं कक्षा तक अंग्रेजी दूसरी भाषा के रूप में पढ़ाई जाती है। सरकार भी शिक्षा के नाम पर हर साल 27 हजार करोड़ रुपए खर्च कर देती है। इसके बावजूद यहां के बारहवीं पास बच्चे अंग्रेजी नहीं बोल पाते हैं। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि बारहवीं तक दूसरी भाषा के रूप में अंग्रेजी पढऩे के बाद भी विद्यार्थियों को न तो ठीक से अंग्रेजी बोलना आता है और ना ही लिखनी। सबसे अधिक समस्या तो तब खड़ी हो जाती है जब किसी नौकरी के साक्षात्कार के दौरान अंग्रेजी नहीं बोल पाने के कारण उन्हें नौकरी नहीं मिल पाती।
उन्होंने कहा कि निजी एवं अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों से पढ़े बच्चों की अंग्रेजी ठीक होने के कारण उन्हें आराम से नौकरी मिल जाती है। इसके चलते सरकारी एवं निजी विद्यालयों में पढऩे वाले बच्चों के बीच गहरी खाई बनती जा रही है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
Published on:
14 Nov 2018 01:32 pm
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