
Bajrang Singh Rajpurohit,Hanuman Temple
चेन्नई. राजस्थान से हजारों किमी दूर दक्षिण की धरती पर तमिलनाडु को अपनी कर्म भूमि बनाने के बावजूद प्रवासियों का अपनी जन्मभूमि से आज भी गहरा नाता एवं लगाव बना हुआ है। यही वजह है कि वे न केवल समय-समय पर जन्मभूमि पर जाते हैं बल्कि वहां सामाजिक-धार्मिक सेवा कार्यों में भी सदैव अग्रणी बने रहते हैं। कुछ ऐसी ही मिसाल कायम की है चेन्नई प्रवासी बजरंग सिंह राजपुरोहित ने। मूल रूप से राजस्थान के नागौर जिले के छोटे से गांव चम्पाखेड़ी मूल के बजरंग सिह राजपुरोहित ने अपने पैतृक गांव में हनुमानजी का मंदिर बनवाया है।
बजरंग सिहं राजपुरोहित करीब 35 साल पहले राजस्थान से तमिलनाडु आए और चेन्नई को अपनी कर्म भूमि बनाया। अपनी मेहनत व लगन ने व्यवसाय को उंचाइयां दीं। बजरंग सिंह राजपुरोहित हनुमानजी के भक्त है। उनके पिता मंगलसिंह राजपुरोहित भी हनुमान जी की खूब पूजा-पाठ करते हैं। ऐसे में पिता की इच्छा थी कि गांव में हनुमानजी का मंदिर बनें। पिछले साल गांव के तालाब के पास ही हनुमानजी के मंदिर के निर्माण का काम शुरु हुआ। जोधपुरी छित्तर के पत्थर तथा मार्बल व ग्रेनाइट से मंदिर का निर्माण करवाया गया है। मंदिर में करीब ढाई फीट की हनुमानजी की मार्बल की प्रतिमा स्थापित की गई है। अब 30 मार्च को मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा करवाई जाएगी। पांच दिवसीय समारोह 26 मार्च को कलश यात्रा के साथ शुरू होगा। प्रतिष्ठा महोत्सव में देशभर से भक्तगण शामिल होंगे। तमिलनाडु से भी बड़ी संख्या में प्रवासी समारोह में पहुंचेंगे।
बजरंग सिहं राजपुरोहित कई सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं से जुड़े रहकर मानवीय सेवा करते रहे हैं। कोरोना काल के समय भी उन्होंने आर्थिक मदद के साथ ही विभिन्न जगहों पर भोजन के पैकेट वितरित किए थे। इसके अलावा भी वे समय-समय पर जरुरतमन्द लोगों की मदद के लिए आगे आते रहे हैं।
हनुमान जी के प्रति अटूट श्रद्धा एवं भक्ति-भाव
मेरे पिता हनुमान जी के भक्त हैं। मैं स्वयं भी रोजाना पूजा-पाठ करता हूं। पिताजी की हार्दिक इच्छा थी कि गांव में हनुमानजी का मंदिर बने। पिताजी की इच्छा एवं उनकी हनुमान जी के प्रति अटूट श्रद्धा एवं भक्ति-भाव होने के चलते हनुमान जी का मंदिर बनाने का विचार आया। पिछले साल गांव में हनुमान जी के मंदिर का निर्माण शुरू किया और अब मंदिर बनकर तैयार हो गया। प्रतिष्ठा के बाद मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना होने से सभी भक्तों को इसका लाभ मिल सकेगा। बचपन में हम जहां पले-बढ़े, खेले-कूदे। वे पुरानी स्मृतियां भी इससे ताजा हो गई।
बजरंग सिंह राजपुरोहित, चेन्नई प्रवासी।
Published on:
25 Mar 2023 11:20 pm

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