
Hindi signages Gudiyatham station painted black: Hindi imposition
चेन्नई.
गृह मंत्री अमित शाह ने देश की साझी भाषा के तौर पर हिंदी को अपनाने की वकालत की थी। उनके इस बयान पर विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। दक्षिण राज्य विशेषकर तमिलनाडु में हिन्दी अपनाने का विरोध तूल पकड़ता जा रहा है।
इसी कड़ी में वेलूर जिले के गुडियात्तम रेलवे स्टेशन पर कुछ असामाजिक तत्वों ने प्लेटफॉर्म पर लगे बोर्ड से हिन्दी में स्टेशन का नाम पर कालिख पोत दिया।
इस मामले में पुलिस ने डीएमके आईटी विंग के २४ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। उल्लेखनीय है कि बोर्ड पर अंगेजी, हिन्दी और तमिल में रेलवे स्टेशन का नाम लिखा था जहां कुछ युवकों ने कालिख पोत दिया।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। इसमें कुछ लोग लोग दिख रहे हैं। ये स्टेशन पर जाते हैं और वहां पर लगे बोर्ड से सबसे पहले हिन्दी में लिखे गुडियात्तम नाम को मिटाते हैं।
वीडियो में डीएमके के आईटी विंग के सदस्यों को डोन्ट ओपोजिट तमिल का विरोध करते हुए देखा गया और हम तमिल की रक्षा करेंगे। हिंदी थोपो मत के नारे लगा रहे थे। हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को पास के एक हॉल में ले जाया गया।
ट्विटर पर लिखते हुए गृह मंत्री ने कहा था कि "पूरे देश के लिए एक भाषा" होना अनिवार्य है। अगर देश के अधिकांश हिस्सों में एक ही भाषा है जो देश को अक्षुण्ण रख सकती है, तो वह हिंदी है, जो देश के अधिकांश हिस्सों में बोली जाती है।
अमित शाह के बयान के बाद डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने कहा कि हम हिंदी को थोपे जाने का लगातार विरोध कर रहे हैं। अमित शाह द्वारा की गई टिप्पणी ने हमें झटका दिया, यह देश की एकता को प्रभावित करेगा। हमारी मांग हैं कि वे अपना बयान वापस ले।
अभिनेता से नेता बने कमल हासन और रजनीकांत ने भी कहा कि किसी भी भाषा को लोगों पर मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
रजनीकांत ने कहा कि हिंदी थोपा नहीं जाना चाहिए। सिर्फ तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि दक्षिणी राज्यों में से कोई भी हिंदी लागू नहीं करेगा। केवल हिंदी ही नहीं, किसी भी भाषा को लागू नहीं किया जाना चाहिए।
हासन ने शाह की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए ट्विटर पर एक वीडियो संदेश जारी किया। एक समावेशी भारत को एक विशेष में न बनाएं। इस तरह की अदूरदर्शी मूर्खता के कारण सभी पीडि़त होंगे।
Published on:
18 Sept 2019 06:07 pm
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