
ऐतिहासिक होगा मर्यादा महोत्सव
क्षेत्रीय प्रभारी विजय डूंगरवाल ने कोयम्बत्तूर सभा को सक्रिय बताते हुए आगामी मर्यादा महोत्सव के सफल आयोजन पर चर्चा की, महासभा कार्यकारिणी सदस्य रमेश पटावरी ने महासभा के वर्तमान आयामों की जानकारी दी
कोयम्बत्तूर. महासभा के प्रतिनिधियों ने कोयम्बत्तूर क्षेत्र की संगठन यात्रा के दौरान यहां की संस्थाओं के पदाधिकारियों से विचार-विमर्श किया। महासभा आंचलिक प्रभारी नरेंद्र नखत ने ज्ञानशाला और एवं सभा के कार्यक्रमों के बारे में जानकारी ली। क्षेत्रीय प्रभारी विजय डूंगरवाल ने कोयम्बत्तूर सभा को सक्रिय बताते हुए आगामी मर्यादा महोत्सव के सफल आयोजन पर चर्चा की। महासभा कार्यकारिणी सदस्य रमेश पटावरी ने महासभा के वर्तमान आयामों की जानकारी दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि कोयम्बत्तूर से उपासक श्रेणी में ज्यादा से ज्यादा श्रावक तैयार होंगे। महासभा उपाध्यक्ष विनोद लूणिया ने कहा -गुरुदेव ने महासभा को 'संस्था शिरोमणिÓकी उपमा दी है। यह हमारे लिए गौरव का विषय है। उन्होंने आगामी महासभा अधिवेशन में ज्यादा से ज्यादा उपस्थिति का आह्वान किया। स्थानीय सभा के मंत्री प्रेम सुराणा, कोय बतूर क्षेत्र से महासभा एवं जैन विश्व भारती के कार्यकारिणी सदस्य जितेंद्र पुगलिया ने भी विचार रखे। संचालन कोषाध्यक्ष बच्छराज गिडिय़ा ने किया।
धर्म का उद्देश्य कर्मों की निर्जरा हो: वीरेन्द्र मुनि
सुख पाने के लिएधर्म की आराधना, दान, दया, जप-तप करने पड़ते हैं। आराधना व साधना के अभाव में सुख की प्राप्ति संभव नहीं।मुनि ने कहा कि बिना पुण्य के सुख नहीं मिल सकता
कोयम्बत्तूर. आरएस पुरम स्थित आराधना भवन में चातुर्मासिक प्रवचन में वीरेन्द्र मुनि ने कहा कि संसार के सभी जीव सुख चाहते हैं लेकिन सुख-सुख बोलने से सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती। सुख पाने के लिएधर्म की आराधना, दान, दया, जप-तप करने पड़ते हैं। आराधना व साधना के अभाव में सुख की प्राप्ति संभव नहीं।मुनि ने कहा कि बिना पुण्य के सुख नहीं मिल सकता। लेकिन पुण्य प्राप्ति के बजाय दान, दया, धर्म करते समय हमारा एक ही लक्ष्य होना चाहिए कि कर्मों की निर्जरा हो। कर्मों के बंधन कटेंगे तभी मुक्ति होगी।

Published on:
01 Aug 2018 01:17 pm
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