
Madras High Court
सीबीएसई कर रही मनमानी
चेन्नई।मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खण्डपीठ ने सीबीएसई से प्रश्न किया है कि एक ही राज्य (बिहार) से सर्वाधिक विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) कैसे पास कर ली?
नीट परीक्षा के तमिल पर्चे में कई गड़बडिय़ां होने पर आपत्ति जताते हुए माकपा के राज्यसभा सांसद टी.के.रंगराजन ने मदुरै खण्डपीठ में याचिका दायर की। उनकी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उक्त बात कही।
याची ने कहा था कि ६ मई को हुई नीट परीक्षा के पर्चे जो तमिल में अनूदित थे में भौतिक विज्ञान के १०, रसायन विज्ञान के ६ और जीव विज्ञान के ३३ प्रश्न समेत ४९ सवाल गलत पूछे गए। प्रत्येक प्रश्न चार अंक का था। गलत पूछे गए प्रश्नों के एवज में तमिल माध्यम के परीक्षार्थियों को १९६ अंक अतिरिक्त मिलने चाहिए। जब तक ये अंक नहीं दे दिए जाते तब तक नीट का नतीजा घोषित नहीं किया जाना चाहिए। गत सोमवार को न्यायाधीश सीटी सेल्वम और न्यायाधीश ए.एम.बशीर के समक्ष सुनवाई के लिए आई थी। केंद्र सरकार ने न्यायिक बेंच से जवाब पेश करने का समय मांगा था।
हाइकोर्ट ने मोहलत देते वक्त यह पूछा था कि भाषागत अनुवाद को लेकर क्या मापदण्ड हैं? प्रश्नपत्र में पूछे गए तमिल शब्दों के समानार्थी अंग्रेजी शब्द खोज कर इनके उपयोग की क्या प्रक्रिया अपनाई जा रही है? उक्त समेत कुछ अन्य सवाल सीबीएसई से करते हुए सुनवाई ६ जुलाई के लिए टाल दी थी।
इस याचिका पर हाइकोर्ट की न्यायिक बेंच ने फिर सुनवाई की। केंद्र सरकार के लिखित शपथपत्र को स्वीकारते हुए उच्च न्यायालय ने सीबीएसई को फटकारा कि नीट को लेकर उसका रवैया मनमाना रहा है। पीठ ने पूछा कि खासकर बिहार से अधिक संख्या में कैसे विद्यार्थियों ने नीट पास की? दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने बिना तारीख बताए फैसला स्थगित कर दिया।
Published on:
07 Jul 2018 05:06 am
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