28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मशीनें हैं तो फिर जान जोखिम में क्यों डाल रहे

मेनहोल की सफाई के लिए मजबूर किया तो होगी कार्रवाई

2 min read
Google source verification
If there are machines then why are you risking

मशीनें हैं तो फिर जान जोखिम में क्यों डाल रहे

कोयम्बत्तूर. नगर निगम आयुक्त डॉ .के विजयकार्तिकेयन ने कहा है कि अगर किसी सफाई कर्मचारी को मेनहोल और सरकार की ओर से प्रतिबंधित सफाई कार्य के लिए मजबूर किया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वे शुक्रवार को वेलंकन्नी मैट्रिकुलेशन हायर सेकेंडरी स्कूल में स्वच्छ भारत ग्रीन इंडिया अभियान के उद्घाटन के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि शहर को साफ सुथरा रखने का दायित्व प्रत्येक नागरिक का है। कोयम्बत्तूर स्वच्छता रैंकिंग में तभी बड़ी छलांग लगा पाएगा जब हम सब एकजुट होंगे।आयुक्त ने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वे इस अभियान के जरिए शहर को साफ सुथरा बनाने में सहयोग कर रहे हैं। यह नजर आना चाहिए। स्कूल से लेकर अपने घर के आसपास सफाई रखना उनका दायित्व है। तभी अभियान की सार्थकता है।

वे मास्क लगाए , हाथों में दस्ताने पहनें। इससे वे कई बीमारियों से बचे रहेंगे

इस मौके पर'क्लीन इंडियाÓ विषय पर आधाारित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार बांटे गए। उन्होंने सफाई कार्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए सफाई कर्मियों को भी पुरस्कृत किया। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मी काम करते समय सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करे। वे मास्क लगाए , हाथों में दस्ताने पहनें। इससे वे कई बीमारियों से बचे रहेंगे।आयुक्त ने पिछले दिनों मेनहोल की सफाई के दौरान दम घुटने से एक सफाई कर्मी की मौत की याद दिलाई। जुलाई के पहले सप्ताह में 100 फीट रोड की 9वीं सड़क पर एक मकान के सैप्टिक टैंक की सफाई के लिए महेन्द्रन ने ठेका लिया ता।वह टैंक में उतरा ही ता कि जहरीली गैस से उसका दम घुटने लगा। उसे बाहर निकाला गया, लेकिन मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इसी तरह २२ दिस बर को शहर के आर एस पुरम इलाके में तीन युवाओं की कैमिकल के टैंक की सफाई करते समय दम घुट जाने से मौत हो गई थी।इनमें दो सफाई कर्मी व तीसरा इनकी जान बचाने के लिए उतरा युवक शामिल था। कार्तिकेयन ने कहा कि जब मेनहोल व सैप्टिक टैंक की सफाई के लिए निगम के पास लाखों की लागत की मशीनें मौजूद हैं तो फिर उनका उपयोग क्यों नहीं किया जाता। पांच सौ-हजार रुपए के पीछे जान जोखिम में डालने की कोई तुक नहीं। उन्होंने सफाई कर्मियों से कहा कि वे खतरे के इस काम को नहीं करें।